नए अखाड़ा परिषद प्रमुख ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की, फैसले से कई महंत नाराज
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नए चुने गए अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के महंत रविंद्र पुरी ने घोषणा की है कि एबीएपी यूपी और उत्तराखंड चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करेगी और योगी आदित्यनाथ फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे.
प्रयागराज, 26 अक्टूबर : अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नए चुने गए अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के महंत रविंद्र पुरी (Ravindra Puri) ने घोषणा की है कि एबीएपी यूपी और उत्तराखंड चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करेगी और योगी आदित्यनाथ फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे." हालांकि, उनकी इस घोषणा के बाद कई महंतों ने नाराजगी जताई हैं. पुरी ने कहा, "जो राजनीतिक पार्टी राम के साथ है, अखाड़ा परिषद उसके साथ है." उन्होंने आगे कहा, "अगर सनातन धर्म को बचाना है, तो योगी को दोबारा लाना है." हालांकि, महंत रविंद्र पुरी की ओर से भाजपा का खुले तौर पर समर्थन ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है.
बाघंबरी मठ के एक अनुआई ने कहा, "अखाड़ा परिषद के लिए अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं की घोषणा करना अशोभनीय है, उसने अब जो पद धारण किया है, उसकी गरिमा को कम कर दिया है. एबीएपी ने कभी इस तरह से व्यवहार नहीं किया है, हालांकि सभी जानते हैं कि भाजपा हमारे दिल में निकटतम है. हालांकि, हमारे पास ऐसे शिष्य हैं जो विभिन्न राजनीतिक दलों से भी जुड़े हैं और हम उन्हें त्यागने वाले नहीं हैं." महंत रविंद्र पुरी का एबीएपी के प्रमुख के रूप में चुनाव पहले ही विवादों में घिर गया है क्योंकि सोमवार को प्रयागराज में हुई बैठक में 13 सदस्यों में से केवल सात अखाड़ों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे.
21 अक्टूबर को एबीएपी के एक अन्य गुट की बैठक हरिद्वार में हुई, जहां एक कार्यकारी निकाय का गठन किया गया. बैठक में सात अखाड़ों- निर्मोही, निवार्णी, दिगंबर, महानिरवाणी, अटल, बड़ा उदासीन और निर्मल ने भाग लिया. रैंकों में विभाजन पर टिप्पणी करते हुए, महंत रविंद्र पुरी ने कहा, "हरिद्वार में एक 'फर्जी' कार्यकारी निकाय बनाया गया है क्योंकि जब महासचिव ने प्रयागराज में 25 अक्टूबर को एबीएपी की बैठक पहले ही निर्धारित की थी, तो एक और बैठक क्यों थी? यह आम चलन है कि अध्यक्ष की असामयिक मृत्यु की स्थिति में उसी अखाड़े का सदस्य अध्यक्ष बन जाता है." एबीएपी के महासचिव महंत हरि गिरि ने कहा, "नए अध्यक्ष का चुनाव एबीएपी के नियम, कानून और परंपरा के अनुसार किया गया है और जो किसी कारणवश नहीं आए, उम्मीद है कि वे निर्धारित 25 नवंबर को होने वाली अगली बैठक में शामिल होंगे." यह भी पढ़ें : Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में ग्रेनेड हमले में छह नागरिक घायल
निर्मल अखाड़े के महंत रेशम सिंह ने कहा, "अदालत ने मुझे निर्मल अखाड़े के अध्यक्ष के रूप में मान्यता दी है और मेरे अलावा निर्मल अखाड़े से किसी भी बैठक में जाने वालों की कोई वैधता नहीं है और यदि आवश्यक हो तो ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी." संयोग से, निर्मल अखाड़े के प्रतिनिधियों ने एबीएपी के दूसरे गुट का समर्थन किया, जिसने इस महीने की शुरुआत में हरिद्वार में एक बैठक की थी. एबीएपी के दूसरे धड़े के महासचिव महंत राजेंद्र दास ने कहा, "अखाड़ा परिषद का चुनाव 21 अक्टूबर को हुआ था. श्री निरंजनी अखाड़े में हुए चुनाव और बैठक में सभी अखाड़ों के साधुओं को प्रतिनिधित्व मिला है."
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 26, 2021 12:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

