NEET Protest: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के आश्वासन के बाद CJP ने वापस लिया 5 सितंबर का दिल्ली प्रोटेस्ट मार्च; FIR वापस लेने और मुआवजे पर बनी सहमति

कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपना विरोध मार्च वापस ले लिया है. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा 20 से 25 जुलाई के नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज की गई एफआईआर वापस लेने और प्रदर्शनकारियों से किए गए वादों को निभाने का ठोस आश्वासन देने के बाद लिया गया.

(AP Photo/Shekhar Yadav)

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित अपने बड़े विरोध मार्च के आह्वान को वापस ले लिया है. यह निर्णय मंगलवार, 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा 20 से 25 जुलाई के जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेने और अन्य मांगों पर ठोस आश्वासन दिए जाने के बाद लिया गया.

प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सीजेपी के प्रवक्ता और सह-संयोजक सौरव दास ने मार्च वापस लेने का बयान दिया. उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश और केंद्र के सकारात्मक आश्वासन के मद्देनजर संगठन इस आंदोलन को वापस लेना उचित समझता है. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए टिप्पणी की कि यदि दोनों पक्ष सद्भाव दिखाएं तो सभी मुद्दों का समाधान संभव है. यह भी पढ़ें: CJP Portal Launch: 20 जुलाई की हिंसा मामले में CJP ने लॉन्च की वेबसाइट; दिल्ली पुलिस के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर दर्ज कराएगी FIR

क्यों बुलाया गया था 5 सितंबर का विरोध मार्च?

नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ 25 जुलाई को राष्ट्रव्यापी आंदोलन समाप्त होने के बाद सीजेपी ने 24 अगस्त को दोबारा मार्च का ऐलान किया था.

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि आंदोलन समाप्त करते समय केंद्र सरकार ने एफआईआर रद्द करने और लिखित आश्वासन देने के जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया. इसी गतिरोध के चलते सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मंगलवार को केंद्र सरकार ने अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की.

CJP ने 5 सितंबर का दिल्ली प्रोटेस्ट मार्च वापस लिया

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के तीन प्रमुख आश्वासन

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में दी गई तीन मुख्य प्रतिबद्धताओं पर पूरी तरह कायम है:

  1. पुरानी एफआईआर पर रोक: 20 से 25 जुलाई के बीच हुए घटनाक्रम को लेकर प्रदर्शनकारियों पर दर्ज प्राथमिकियों पर आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
  2. नई एफआईआर दर्ज न करना: उन घटनाओं के संबंध में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा.
  3. मुआवजे की रूपरेखा: आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को वित्तीय सहायता और मुआवजा दिया जाएगा.

दिल्ली पुलिस ने 2,873 लोगों के लिए मांगी सीमित छूट

सॉलिसिटर जनरल ने दिल्ली पुलिस की ओर से एक विशेष आवेदन भी पीठ के समक्ष रखा. इसके तहत उन 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ नए मामले दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है, जिनका कथित तौर पर गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है.

तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल दिल्ली के लिए मांगी गई है और यह सामान्य प्रदर्शनकारियों पर लागू नहीं होगी. यदि जांच में यह साबित होता है कि इन 2,873 लोगों ने आंदोलन के दौरान शारीरिक नुकसान पहुंचाया या संपत्ति को क्षति पहुंचाई, तभी उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगी गई है.

मुआवजा नीति तय करने के लिए केंद्र को मिला 3 महीने का समय

आत्महत्या करने वाले पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पर केंद्र ने राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों से परामर्श कर अंतिम रूपरेखा तैयार करने के लिए तीन महीने की मोहलत मांगी है.

सुप्रीम कोर्ट ने आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि दावों का सत्यापन निष्पक्ष रूप से किया जाए. सीजेपी के वकील ने स्पष्ट किया कि मांगी गई तीन महीने की यह अवधि भुगतान की अंतिम प्रक्रिया पूरी करने के लिए है. अदालत की इस सकारात्मक कार्यवाही के बाद 5 सितंबर के प्रदर्शन को लेकर बना गतिरोध फिलहाल समाप्त हो गया है.

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