उत्तर प्रदेश में दिल का दौरा पड़ने से जेल में कैद तबलीगी जमाती नसीम अहमद की हुई मौत

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में तबलीगी जमात से ताल्लुक रखने वाले नसीम अहमद की मौत हो गई है. 28 अप्रैल को अचानक तबीयत बिगड़ने की वजह से अहमद को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में जांच के लिए उन्हें बीएचयू के अस्पताल में भी ले जाया गया. अचानक तबीयत बिगड़ने के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Twitter)

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) से ताल्लुक रखने वाले नसीम अहमद की मौत हो गई है. 65 वर्षीय नसीम दिल के मरीज थे और उन पर बांग्लादेशियों को शरण दिलाने और उनकी जानकारी को छिपाने का आरोप था और इसी के चलते अप्रैल माह के शुरुआती हफ्ते में उन्हें हिरासत में ले लिया गया था. बुधवार की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

संभागीय आयुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा, "जिला प्रशासन को सूचित किए बिना 14 बांग्लादेशियों सहित तब्लीगी जमातियों के लिए रहने की व्यवस्था करने के चलते नसीम अहमद पर एक मामला दर्ज किया गया था. वह दिल के मरीज थे और पिछले नौ दिनों में उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था. दिल का दौरा पड़ने को उनकी मौत की वजह बताई जा रही है. जौनपुर पुलिस ने उनके शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेजा है."

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अधिकारियों के मुताबिक, जौनपुर में फिरोजपुर से ताल्लुक रखने वाले अहमद मार्च में दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित हुए तब्लीगी जमात के मरकज में से शामिल होकर लौटे थे. इस समारोह के बाद 14 बांग्लादेशियों सहित 16 जमातियों की एक टोली जौनपुर पहुंची. ये 16 जमाती शहरी इलाके में स्थित बड़ा मस्जिद में रूके थे, लेकिन जब पुलिस के द्वारा जमातियों के खिलाफ अभियान में तेजी लाई गई तब अहमद ने पुलिस स्टेशन इलाका सरायख्वाजा में लाल मस्जिद के पास उनके लिए रहने का बंदोबस्त किया.

31 मार्च को सरायख्वाजा पुलिस ने झारखंड के यसीन अंसारी और पश्चिम बंगाल के मोहम्मद अब्दुल मोतालिब के साथ 14 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया. इन सभी को महामारी रोग अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और फॉरेनर्स एक्ट के उपयुक्त धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया था. कमीश्नर ने कहा, "जांच के दौरान यह पता चला कि अहमद ने ही उनके लिए रहने का बंदोबस्त किया था, जिसके बाद उस पर एक मामला दर्ज किया गया और उसे गिरफ्तार किया गया.

शुरूआत में अहमद को क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखा गया, जहां कोविड-19 के लिए उसका टेस्ट भी किया गया, जिसका नतीजा नेगेटिव आया. इसके बाद जौनपुर प्रशासन द्वारा महामारी का उल्लंघन करने के चलते उसे एक स्कूल में बनाए गए अस्थायी जेल में भेज दिया गया."

28 अप्रैल को अचानक तबीयत बिगड़ने की वजह से अहमद को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में जांच के लिए उन्हें बीएचयू के अस्पताल में भी ले जाया गया. हालत में सुधार आने के बाद उन्हें दोबारा अस्थायी जेल में भेज दिया गया. 30 अप्रैल को उन्हें फिर से जौनपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां स्थिति में सुधार आने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई.

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