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Mumbai Water Crisis: मानसून की देरी से बढ़ी मुंबई की चिंता, झीलों में बचा केवल 9% पानी; विशेषज्ञों ने रीसाइकल्ड वॉटर के उपयोग और जल बचत उपायों को अपनाने की दी सलाह

मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले सात प्रमुख जलाशयों का जलस्तर गिरकर केवल 9 प्रतिशत रह गया है. मानसून में देरी के कारण पैदा हुए इस गंभीर जल संकट के बीच पर्यावरण विशेषज्ञों ने रीसाइकल्ड वॉटर के इस्तेमाल, भूजल पुनरुद्धार और जल संरक्षण को तुरंत बढ़ावा देने की अपील की है.

Mumbai Water Crisis: मानसून की देरी से बढ़ी मुंबई की चिंता, झीलों में बचा केवल 9% पानी; विशेषज्ञों ने रीसाइकल्ड वॉटर के उपयोग और जल बचत उपायों को अपनाने की दी सलाह

Mumbai Water Crisis:  देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इस समय भीषण जल संकट की चपेट में है. आज, 21 जून 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले सातों प्रमुख जलाशयों का कुल लाइव जलस्टॉक गिरकर महज 9 प्रतिशत (लगभग 1.30 लाख मिलियन लीटर) रह गया है. मानसून के आगमन में देरी और कैचमेंट एरिया में पर्याप्त बारिश न होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है. इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए पर्यावरणविदों और जल प्रबंधन विशेषज्ञों ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए रीसाइकल्ड वॉटर (पुनर्चक्रित पानी) के उपयोग, भूजल स्तर को सुधारने और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को अनिवार्य करने पर जोर दिया है.

जलाशयों की स्थिति चिंताजनक

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, शहर की प्यास बुझाने वाली झीलें इस समय अपने सबसे निचले स्तर के करीब हैं. मुंबई का दूसरा सबसे बड़ा जल स्रोत 'अप्पर वैतरणा' पूरी तरह सूख चुका है और इसका लाइव स्टॉक शून्य पर आ गया है.

वहीं, सबसे बड़े जलाशय 'भातसा' में केवल 8.30 प्रतिशत और 'तानसा' में महज 3.46 प्रतिशत पानी बचा है. छोटे जलाशयों में मोडक सागर (25.18%) और तुलसी (22.28%) की स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे शहर के लिए केवल 35 से 40 दिनों का पानी ही शेष रह गया है.

बीएमसी ने लागू की पानी की कटौती

जलस्तर में आई इस भारी गिरावट को देखते हुए बीएमसी ने शहर भर में पानी की सप्लाई में 10 प्रतिशत की कटौती पहले से ही लागू कर रखी है. इसके अलावा, कमर्शियल और औद्योगिक (Industrial) प्रतिष्ठानों के लिए पानी की आपूर्ति में 20 प्रतिशत तक की कटौती की गई है.

नए नियमों के तहत शहर के सभी स्विमिंग पूलों की जलापूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी गई है. निर्माण स्थलों (Construction Sites) के लिए नए पानी के कनेक्शन देने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके साथ ही, पीने के पानी से गाड़ियों को धोने, बागवानी करने और सड़कों की सफाई करने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

विशेषज्ञों की राय

इस संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण और शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई को केवल मानसून और बाहरी झीलों पर निर्भर रहने की आदत बदलनी होगी. विशेषज्ञों ने निम्नलिखित दीर्घकालिक उपायों को तत्काल अपनाने का सुझाव दिया है:

  • रीसाइकल्ड वॉटर का अनिवार्य उपयोग: कंस्ट्रक्शन सेक्टर, औद्योगिक इकाइयों और बागवानी के लिए केवल ट्रीटेड और रीसाइकल्ड सीवेज वॉटर का ही उपयोग किया जाना चाहिए ताकि पीने योग्य पानी को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सके.
  • भूजल का पुनरुद्धार (Groundwater Revival): मुंबई में लगातार कंक्रीटीकरण के कारण जमीन के नीचे पानी नहीं जा पा रहा है, जिससे कुएं और बोरवेल सूख रहे हैं. इसके लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग प्रणालियों को सोसायटियों में कड़ाई से लागू करना होगा.
  • लीकेज पर नियंत्रण: बीएमसी को पानी के वितरण नेटवर्क में होने वाले लीकेज (लगभग 20-25% पानी की चोरी और बर्बादी) को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेना चाहिए.

अगले हफ्ते सक्रिय हो सकता है मानसून

इस संकट के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मुंबईकरों के लिए राहत की खबर दी है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अरब सागर में मानसूनी हवाएं दोबारा मजबूत हो रही हैं. मुंबई और कोंकण क्षेत्र के लिए 22 और 23 जून को येलो अलर्ट जारी किया गया है. अनुमान है कि आगामी दो से तीन दिनों में मुंबई और उसके कैचमेंट एरिया में भारी और व्यापक बारिश का दौर शुरू हो जाएगा, जिससे झीलों के जलस्तर में सुधार होने की उम्मीद है.

 

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 21, 2026 12:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).