Mumbai Water Crisis: BMC के सामने बड़ी चुनौती, मानसून की बेरुखी से मुंबई में गहराया जल संकट, सूखने की कगार पर झीलें, बचा है सिर्फ इतना फीसदी पानी

मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले सात प्रमुख जलाशयों का उपयोगी जल भंडार 30 जून की सुबह 6 बजे तक गिरकर 6.75% के नाजुक स्तर पर पहुंच गया है. कैचमेंट एरिया में बारिश न होने से शहर में पानी की किल्लत बढ़ गई है.

(Photo Credits ANI)

Mumbai Water Crisis: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पीने के पानी का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है. मानसून के आगमन के बाद भी जलग्रहण क्षेत्रों (कैचमेंट एरिया) में भारी बारिश न होने के कारण मुंबई को पानी की सप्लाई करने वाले सात प्रमुख जलाशयों का उपयोगी जल भंडार बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग द्वारा साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार (30 जून) सुबह 6 बजे तक झीलों में कुल क्षमता का केवल 6.75 प्रतिशत पानी ही शेष बचा है. अधिकारियों के मुताबिक झीलों में अब महज कुछ ही दिनों का स्टॉक मौजूद है.

30 जून सुबह 6 बजे तक का आधिकारिक आंकड़ा

बीएमसी द्वारा मंगलवार, 30 जून को सुबह 6 बजे साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई की सातों झीलों में कुल मिलाकर उपयोगी लाइव स्टॉक घटकर लगभग 6.75% के स्तर पर आ गया है. वर्तमान में इन जलाशयों में करीब 1 लाख मिलियन लीटर से भी कम उपयोगी पानी बचा हुआ है, जबकि इन झीलों की कुल आवश्यक क्षमता 14.47 लाख मिलियन लीटर है.  यह भी पढ़े:  Mumbai Water Crisis: मानसून की देरी से बढ़ी मुंबई की चिंता, झीलों में बचा केवल 9% पानी; विशेषज्ञों ने रीसाइकल्ड वॉटर के उपयोग और जल बचत उपायों को अपनाने की दी सलाह

इसकी तुलना अगर पिछले साल (2025) की समान अवधि से की जाए, तो जून के अंत में इन झीलों में इससे अधिक पानी का विशाल भंडार उपलब्ध था. इससे साफ होता है कि इस साल स्थिति कितनी चिंताजनक है.

मुंबई में गहराया जल संकट

प्रमुख झीलों की वर्तमान स्थिति

मुंबई को पानी देने वाली सातों झीलों में से मुख्य बड़े जलाशयों की स्थिति अलग-अलग स्तर पर गंभीर बनी हुई है. बीएमसी की 30 जून सुबह की रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख झीलों का हाल कुछ इस प्रकार है.

बीएमसी के उठाए सख्त कदम

जलाशयों में पानी के लगातार घटते स्तर को देखते हुए बीएमसी प्रशासन ने पूरे मुंबई महानगर में पहले ही 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू कर रखी है. इसके अलावा वाणिज्यिक (Commercial) और औद्योगिक (Industrial) प्रतिष्ठानों, जैसे कि स्विमिंग पूल, क्लबों और निर्माण स्थलों के पानी की सप्लाई में 20 प्रतिशत की बड़ी कटौती की गई है.

बीएमसी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि कैचमेंट एरिया में अगले कुछ दिनों में भारी बारिश नहीं होती है, तो आवासीय क्षेत्रों (Residential areas) में अतिरिक्त 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू करने पर विचार किया जा सकता है. प्रशासन अवैध वाटर कनेक्शनों और बूस्टर पंपों के खिलाफ भी कड़ा अभियान चला रहा है.

कैचमेंट एरिया में बारिश न होना मुख्य वजह

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई शहर और तटीय इलाकों में तो मानसून की बारिश देखी गई है, लेकिन मुख्य कैचमेंट एरिया, जो ठाणे और नासिक जिलों के आंतरिक पहाड़ी इलाकों (शाहपुर से इगतपुरी बेल्ट) में आते हैं, वहां अभी तक लगातार और भारी बारिश नहीं हुई है.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों के लिए हालांकि राहत की उम्मीद जताई है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक जुलाई के पहले सप्ताह में इन जलग्रहण क्षेत्रों में मानसून की सक्रियता बढ़ सकती है. बीएमसी अधिकारियों को उम्मीद है कि आगामी स्पेल से झीलों का जलस्तर तेजी से सुधरेगा. तब तक नागरिकों से पानी की एक-एक बूंद को बेहद सावधानी और जिम्मेदारी से खर्च करने की अपील की गई है.

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