MP News: मध्य प्रदेश के खरगोन में कीचड़ में फंसी एंबुलेंस, गर्भवती महिला को बैलगाड़ी से पहुंचाया गया अस्पताल
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के भीकनगांव क्षेत्र में शुक्रवार शाम एक गर्भवती महिला को एम्बुलेंस के कीचड़ में फंस जाने के कारण बैलगाड़ी और फिर दोपहिया वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. महिला ने अस्पताल पहुंचने के बाद मृत बच्ची को जन्म दिया
MP News: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के भीकनगांव क्षेत्र में शुक्रवार शाम एक गर्भवती महिला को एम्बुलेंस के कीचड़ में फंस जाने के कारण बैलगाड़ी और फिर दोपहिया वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. महिला ने अस्पताल पहुंचने के बाद मृत बच्ची को जन्म दिया. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जर्जर सड़क के कारण हुई देरी से बच्चे की जान गई, जबकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि शिशु की मौत अस्पताल पहुंचने से लगभग दो दिन पहले ही हो चुकी थी.
कच्चे रास्ते पर फंसी 108 एम्बुलेंस
पिपलिया पंचायत के मांगिया फालिया निवासी शिवानी को शुक्रवार शाम प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजनों ने तुरंत आशा कार्यकर्ता को बुलाया, जिन्होंने 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचित किया. शाम लगभग 6:20 बजे एम्बुलेंस भीकनगांव से रवाना हुई, लेकिन मांगिया फालिया जाने वाले दो किलोमीटर लंबे कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते में फंस गई. यह भी पढ़े: Madhya Pradesh News: सड़क न होने के कारण दर्द से कराहती दो गर्भवती महिलाओं को बैलगाड़ी और चारपाई पर लिटाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया; देखें VIDEOS
एम्बुलेंस के आगे न बढ़ पाने पर ग्रामीणों ने शिवानी को लगभग दो किलोमीटर तक बैलगाड़ी में बैठाकर पक्की सड़क तक पहुंचाया. वहां से उन्हें मोटरसाइकिल के जरिए शाम 7:20 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया.
चिकित्सीय जांच में क्या आया सामने?
अस्पताल में शाम 7:42 बजे शिवानी ने एक मृत बच्ची को जन्म दिया. भीकनगांव के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. विजय वर्मा ने बताया कि चिकित्सीय परीक्षण के अनुसार यह इंट्रायूटेरिन डेथ (गर्भाशय के भीतर मृत्यु) का मामला था. भ्रूण में त्वचा छिलने और झिल्ली फटने के लक्षण थे, जो प्रसव से लगभग 48 घंटे पहले हुई मृत्यु को दर्शाते हैं.
डॉ. वर्मा ने बताया कि शिवानी को बुधवार सुबह से ही गर्भस्थ शिशु की हलचल महसूस नहीं हो रही थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि बैलगाड़ी के झटकों या रास्ते में हुई देरी का शिशु की मौत से कोई संबंध नहीं है. फिलहाल महिला की स्थिति सामान्य और स्थिर है.
ग्रामीणों का विरोध और स्वास्थ्य विभाग का तर्क
ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि अगर सड़क पक्की होती तो महिला समय पर अस्पताल पहुंच जाती. क्षेत्र के 121 परिवारों ने सड़क निर्माण के लिए कई बार आवेदन दिए हैं, लेकिन अब तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ.
दूसरी ओर, खरगोन के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. दौलत सिंह चौहान ने बताया कि शिवानी अपने पति के साथ 25 जुलाई से 14 सितंबर तक गुजरात में मजदूरी करने गई थीं. इस कारण वह स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की नियमित निगरानी में नहीं थीं. जागरूकता की कमी के चलते परिजनों ने शिशु की हलचल बंद होने की जानकारी समय पर स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी.
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग पर पक्की सड़क के निर्माण का प्रस्ताव पहले ही तैयार कर प्रस्तुत किया जा चुका है. मामले की विस्तृत रिपोर्ट खरगोन कलेक्टर और CMHO को भेजी जा रही है.