Moti Dungri Sinjara Mehndi: मोती डूंगरी मंदिर में मेहंदी लेने उमड़ा कुंवारों का हुजूम; 200 साल पुरानी परंपरा, जानें क्यों बप्पा के प्रसाद से शादी होने की है मान्यता

राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित ऐतिहासिक मोती डूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर आयोजित वार्षिक 'सिंजारा मेहंदी उत्सव' में हजारों अविवाहित युवक-युवतियों की भारी भीड़ उमड़ी. 200 साल से अधिक पुरानी धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान गणेश को विशेष रूप से अर्पित की जाने वाली मेहंदी को प्रसाद के रूप में हाथों में लगाने से विवाह में आ रही समस्त बाधाएं दूर होती हैं और एक वर्ष के भीतर विवाह का योग बन जाता है.

जयपुर: गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले राजधानी जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में आस्था और अनोखी परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला. प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले पारंपरिक सिंजारा मेहंदी उत्सव में इस बार हजारों की संख्या में कुंवारे युवक-युवतियां मंदिर पहुंचे. विघ्नहर्ता भगवान गणेश के चरणों में अर्पित की गई मेहंदी को प्रसाद स्वरूप प्राप्त करने के लिए मंदिर परिसर में किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं. स्थानीय आस्था के अनुसार, यह पवित्र मेहंदी उन युवाओं के लिए वरदान मानी जाती है जिनके विवाह में लगातार अड़चनें या देरी हो रही हैं.

क्यों बांटी जाती है बप्पा के चरणों की मेहंदी?

मोती डूंगरी मंदिर में सिंजारा पर्व के अवसर पर भगवान गणेश का विशेष पूजन कर उन्हें मेहंदी अर्पित की जाती है:

'एक साल में तय हो जाता है रिश्ता': क्या है मान्यता?

इस उत्सव में अविवाहित लड़के-लड़कियों की भारी उपस्थिति के पीछे एक गहरी लोक मान्यता जुड़ी है:

जयपुर मोती डूंगरी गणेश मंदिर मेहंदी उत्सव

 

सोजत से आई 3,500 किलो मेहंदी, 1.8 लाख श्रद्धालुओं का सैलाब

इस साल सिंजारा उत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया:

वायरल रील्स का प्रभाव: सोशल मीडिया पर मंदिर में उमड़ने वाली भीड़ और मेहंदी के चमत्कारिक महत्व से जुड़े रील्स और वीडियो वायरल होने से इस बार देश के विभिन्न राज्यों से करीब 1.8 लाख श्रद्धालु जयपुर पहुंचे.

गणेश चतुर्थी पर विशेष श्रृंगार और स्वर्ण मुकुट

सिंजारा उत्सव के साथ ही मोती डूंगरी में गणेश जन्मोत्सव का मुख्य उल्लास आरंभ हो जाता है:

जयपुर की स्थापना और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़े इस मंदिर में गणेश चतुर्थी के दिन से दस दिनों तक लाखों श्रद्धालु सुख, समृद्धि और पारिवारिक मंगल की प्रार्थना के लिए शीश नवाते हैं.

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