PM Modi Facebook Post Row: पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा ने मांगी आधिकारिक माफी; Joel Kaplan ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने के मामले में सोशल मीडिया दिग्गज 'मेटा' ने भारत सरकार से आधिकारिक रूप से माफी मांग ली है. मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने नई दिल्ली में केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर इस घटना पर खेद व्यक्त किया.

Meta-PM Modi (Photo Credits: ANI/Wikimedia Commons)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के एक फेसबुक पोस्ट (Facebook Post) और वीडियो को स्वचालित सिस्टम द्वारा हटाए जाने के मामले में सोशल मीडिया (Social Media) कंपनी 'मेटा' (Meta) ने भारत सरकार के समक्ष आधिकारिक रूप से माफी मांगी है. बुधवार, 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर (Chief Global Affairs Officer) जोएल कपलान (Joel Kaplan) ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ( Ashwini Vaishnaw) से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर इस घटना पर अफसोस जताया. यह भी पढ़ें: PM Modi Video Row: पीएम मोदी के फेसबुक वीडियो विवाद पर Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने ऑपरेशनल गलतियों के लिए मांगी माफी

मेटा द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में जोएल कपलान ने कहा:

"मैंने पीएम मोदी की पोस्ट को प्रतिबंधित करने वाली तकनीकी त्रुटि के लिए मेटा की ओर से केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से माफी मांगी है."

क्या था पूरा विवाद?

यह विवाद 23 जुलाई 2026 का है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का युवाओं और छात्रों को संबोधित करता एक वीडियो संदेश फेसबुक पर पोस्ट किया गया था. इस वीडियो में पीएम मोदी परीक्षा पत्रों के लीक होने की घटनाओं के खिलाफ कड़े कदम उठाने का आश्वासन दे रहे थे.

यह वीडियो लगभग 5 घंटे तक फेसबुक पर अनुपलब्ध रहा. मेटा ने शुरुआत में इसे अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम की तकनीकी खराबी (Technical Glitch) करार दिया था, लेकिन भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस स्पष्टीकरण को 'अपर्याप्त' मानते हुए कंपनी के वैश्विक अधिकारियों को समन भेजा था.

'सेफ हार्बर' सुरक्षा और कानूनी अनुपालन की समीक्षा

बैठक के दौरान भारतीय अधिकारियों और आईटी सचिव एस. कृष्णन ने मेटा की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए. अधिकारियों ने तर्क दिया कि चूंकि मेटा के एल्गोरिदम खुद यह तय करते हैं कि कौन सा कंटेंट किस यूजर को दिखाया जाए, इसलिए वे केवल एक निष्क्रिय मध्यस्थ (Passive Intermediary) नहीं हैं.

अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्लेटफॉर्म अपने स्वचालित प्रणालियों में सुधार नहीं करता है, तो सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) सुरक्षा की समीक्षा की जा सकती है. सेफ हार्बर सुरक्षा हटने पर प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कंपनी सीधे कानूनी रूप से जिम्मेदार होगी. यह भी पढ़ें: CSAM Content: क्या है CSAM कंटेंट? मार्क जुकरबर्ग द्वारा भारत सरकार से माफी मांगने की खबरों के बीच; जानें इससे जुड़ी हर जरूरी जानकारी

बाल सुरक्षा, डीपफेक और एल्गोरिदम पर भी चिंताएं

पीएम मोदी के वीडियो के अलावा, भारतीय अधिकारियों ने मेटा प्रतिनिधिमंडल के सामने कई अन्य गंभीर सुरक्षा मुद्दे भी उठाए:

संसदीय समिति की चेतावनी

सरकारी स्तर पर हुई इन बैठकों के साथ ही, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली आईटी संसदीय स्थायी समिति ने भी कड़ा रुख अपनाया है. समिति ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग से 3 दिनों के भीतर बिना शर्त लिखित माफी की मांग की है. समिति ने चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर कंपनी के खिलाफ बतौर 'प्रकाशक' (Publisher) दंडात्मक सिफारिशें की जा सकती हैं.

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