Meta Child Safety: भारत सरकार की सख्ती के बाद झुका मेटा, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी भारतीय एजेंसियों को देने पर जताई सहमति
विवरण भारत सरकार की कड़ी कार्रवाई के बाद, सोशल मीडिया दिग्गज मेटा ने बच्चों से जुड़े यौन शोषण और सुरक्षा मामलों की जानकारी सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति व्यक्त की है। यह कदम बच्चों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
Meta Child Safety: केंद्र सरकार की सख्त हिदायत और कानूनी दबाव के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का संचालन करने वाली कंपनी मेटा ने बड़ा कदम उठाया है. कंपनी अब बच्चों से जुड़े सुरक्षा मामलों और बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) की जानकारी सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमत हो गई है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत में काम करने वाले किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की सुरक्षा एक बुनियादी और अनिवार्य शर्त है, जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
I4C पोर्टल के जरिए सीधे होगी रिपोर्टिंग
इससे पहले मेटा बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों की रिपोर्ट अमेरिका स्थित 'नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन' (NCMEC) को भेजता था, जो बाद में भारतीय एजेंसियों से जानकारी साझा करता था. इस प्रक्रिया में देरी होती थी. यह भी पढ़े: Kota Playschool Incident: कोटा के प्लेस्कूल में 3 साल की मासूम से दरिंदगी की आशंका; पुलिस ने खंगाले 10 दिनों के CCTV फुटेज, 11 लोगों के लिए DNA सैंपल
नई व्यवस्था के तहत मेटा अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर सीधी रिपोर्ट दर्ज कराएगा. इससे भारतीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को समय पर जानकारी मिल सकेगी और दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई संभव हो पाएगी.
सरकारी नोटिस और जांच का असर
यह फैसला इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी किए गए कड़े नोटिस और जांच के बाद सामने आया है. इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापनों का मामला सामने आने के बाद मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया था.
इसके साथ ही राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मुद्दे पर कड़ा संज्ञान लिया था. सितंबर महीने में NCPCR ने मेटा इंडिया के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा था.
अन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए भी सख्त संदेश
सरकार ने साफ किया है कि मेटा की यह सीधी रिपोर्टिंग व्यवस्था बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने की दिशा में पहला कदम है. सरकार अन्य प्रमुख डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ भी बातचीत कर रही है ताकि वे स्वतः संज्ञान लेकर ऐसी आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करें और उसे तुरंत हटाएं.
सुरक्षा नियमों का पालन न करने वाले और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.