विजाग तट पर मार्लिन मछली का हमला, मछुआरे की मौत
विशाखापत्तनम तट पर बंगाल की खाड़ी में एक विशाल ब्लैक मार्लिन मछली के हमले में एक मछुआरे की मौत हो गई. मछुआरे पर विशाल मछली ने उस वक्त हमला किया, जब वह चार अन्य लोगों के साथ तट से 60 समुद्री मील में मछली पकड़ रहा था.
विशाखापत्तनम, 3 फरवरी : विशाखापत्तनम तट पर बंगाल की खाड़ी में एक विशाल ब्लैक मार्लिन मछली के हमले में एक मछुआरे की मौत हो गई. मछुआरे पर विशाल मछली ने उस वक्त हमला किया, जब वह चार अन्य लोगों के साथ तट से 60 समुद्री मील में मछली पकड़ रहा था. क्षेत्र में अपनी तरह की यह पहली घटना बताई जा रही है, जो बुधवार को हुई. परवाड़ा मंडल के मुथ्यालम्मा पालेम के मोली जोगन्ना (40) चार अन्य लोगों के साथ मंगलवार शाम को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने गए थे और अगली सुबह तक मछली पकड़ते रहे.
उन्होंने एक बड़ी मछली को जाल में फंसाया और चूंकि वह भारी थी और वे जाल नहीं उठा पा रहे थे, इसलिए जोगन्ना पानी की जांच करने के लिए पानी में चला गया. अचानक, मछली बाहर निकली और अपने नुकीले थूथन से जोगन्ना के पेट में छेद कर दिया. अन्य मछुआरों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन व्यर्थ रहा. जोगन्ना के साथ आए मछुआरों के अनुसार, उन पर 'कोमू कोनम' ने हमला किया था, जिसे स्थानीय रूप से ब्लैक मार्लिन मछली बुलाया जाता है. जोगन्ना के शव को अन्य मछुआरे किनारे पर लाए. घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए. यह भी पढ़ें : महाराष्ट्र : नासिक में पहाड़ की चोटी से गिरकर दो पर्वतारोहियों की मौत, एक घायल
शव को पोस्टमार्टम के लिए अनाकापल्ले के सरकारी अस्पताल ले जाया गया. परवाड़ा पुलिस ने कहा कि मामला जांच के लिए तटीय सुरक्षा पुलिस को सौंप दिया गया है. एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि अतीत में मछुआरों पर विशालकाय मछलियों के हमले की घटनाएं हुई हैं, लेकिन यह पहली घटना थी जहां हमले में किसी मछुआरे की जान चली गई. कहा जाता है कि मार्लिन मछली बहुत आक्रामक और तेज तैराक होती है और अपने तेज ऊपरी थूथन से हमला करती है. सर्दियों के महीनों में मार्लिन को अक्सर विशाखापत्तनम समुद्र तट पर देखा जाता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 03, 2022 03:14 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

