Maharashtra SIR Form: मुंबई, ठाणे और पुणे में बड़ी संख्या में एसआईआर फॉर्म जमा नहीं हुए, चुनाव आयोग ने जारी किए आंकड़े

राज्य के सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े दर्शाते हैं कि महाराष्ट्र में कुल 9.78 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से लगभग 21.15 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हो सके (Uncollectible Category).

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Maharashtra SIR:  महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच एक बड़ा अंतर सामने आया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों के निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसे 'गणना फॉर्म' (Enumeration Forms) की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है, जिन्हें जमा या डिजिटाइज नहीं किया जा सका.

इसके विपरीत, राज्य के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के निर्वाचन क्षेत्रों ने इस प्रक्रिया में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 90 प्रतिशत से अधिक डिजिटाइजेशन हासिल किया है.  यह भी पढ़े: voters.eci.gov.in पर अपना SIR एन्यूमरेशन स्टेटस ऑनलाइन वेरिफ़ाई करने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

EC ने जारी किए आंकड़े

शहरी क्षेत्रों में फॉर्म न मिलने की उच्च दर

राज्य के सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े दर्शाते हैं कि महाराष्ट्र में कुल 9.78 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से लगभग 21.15 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हो सके (Uncollectible Category).

ठाणे जिले का भिवंडी ईस्ट 49.10 प्रतिशत की दर के साथ इस सूची में सबसे ऊपर रहा. इसके बाद दक्षिण मुंबई का कोलाबा क्षेत्र 46.97 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा. पुणे के खड़कवासला में 46.57 प्रतिशत, पालघर के नालासोपारा में 46.36 प्रतिशत और पुणे के कोथरुड में 46.22 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं किए जा सके.

संख्या के हिसाब से देखें तो विशाल मतदाता आधार वाले क्षेत्रों में यह आंकड़ा बेहद बड़ा है. नालासोपारा क्षेत्र में 3.06 लाख से अधिक (46.36%) और हडपसर क्षेत्र में 2.98 लाख से अधिक (45.80%) फॉर्म अनकलेक्टिबल दर्ज किए गए. इसी प्रकार खड़कवासला, कल्याण ग्रामीण और ओवला-माजीवाड़ा क्षेत्रों में भी 2.5 लाख से अधिक फॉर्म डिजिटल रूप से दर्ज नहीं हो सके.

मुंबई के प्रमुख प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्र कोलाबा में 46.97 प्रतिशत और मालाबार हिल क्षेत्र में 39.02 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हो पाए. इसके अतिरिक्त भिवंडी वेस्ट, शिवाजीनगर, अंबरनाथ, ऐरोली, मुंब्रा-कलवा और मानखुर्द शिवाजीनगर जैसे क्षेत्रों में भी यह दर 42 से 44 प्रतिशत के बीच रही.

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों का उत्कृष्ट प्रदर्शन

इसके विपरीत, राज्य के कई ग्रामीण और आदिवासी विधानसभा क्षेत्रों ने फॉर्म कलेक्शन में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जहां अनकलेक्टिबल फॉर्म की दर 10 प्रतिशत से भी कम रही.

अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) जिले का अकोले (ST) क्षेत्र पूरे राज्य में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा, जहां केवल 6.11 प्रतिशत फॉर्म ही अनकलेक्टिबल रहे और 93.89 प्रतिशत फॉर्म सफलतापूर्वक डिजिटाइज कर लिए गए.

इसके बाद बुलढाणा का जलगांव (जामोद) 6.20 प्रतिशत, खामगांव 6.27 प्रतिशत, बीड का आष्टी 6.37 प्रतिशत और चंद्रपुर का चिमूर 6.46 प्रतिशत के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे.

गढ़चिरौली (ST), आमगांव/आर्मोरी (ST) और नवापुर (ST) जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भी डिजिटाइजेशन का स्तर काफी ऊंचा रहा, जहां अनकलेक्टिबल दर 8 से 9 प्रतिशत के आसपास ही रही.

शहरी-ग्रामीण प्रदर्शन के पीछे के प्रमुख कारण

निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, बड़े शहरी क्षेत्रों में अक्सर प्रवासन (Migration), बार-बार पते में बदलाव, बंद कमरे/मकान और काम के सिलसिले में लंबे समय तक बाहर रहने जैसी वजहों से बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के लिए मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क करना चुनौतीपूर्ण होता है.

दूसरी ओर, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत स्थायी निवास स्थिति और मजबूत सामुदायिक संपर्क के कारण बीएलओ के लिए घर-घर जाकर फॉर्म सत्यापित करना अधिक आसान साबित हुआ.

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