Maharashtra News: मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र FDA का बड़ा फैसला, अस्पताल अब अपनी फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए नहीं कर सकेंगे मजबूर

महाराष्ट्र अन्न व औषध प्रशासन (FDA) ने मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है. अब निजी अस्पताल मरीजों को अपने इन-हाउस मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे.

Maharashtra News:  मरीजों के अधिकारों की रक्षा करने और दवाओं की मनमानी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र अन्न व औषध प्रशासन (FDA) ने एक बड़ा और सख्त निर्देश जारी किया है. नए नियम के तहत अब राज्य का कोई भी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर या किसी खास दुकान से ही दवाएं खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस नीति की घोषणा करते हुए साफ किया कि मरीजों को अपनी पसंद के किसी भी परवानाधारक (लाइसेंस प्राप्त) मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने का मौलिक अधिकार है.

यह फैसला राज्य भर से मिल रही उन तमाम शिकायतों के बाद आया है, जिनमें कहा गया था कि निजी अस्पताल अपनी स्थिति का फायदा उठाकर मरीजों को महंगे दामों पर दवाएं खरीदने के लिए बाध्य करते हैं. ऐसे में मरीज स्वतंत्र मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध सस्ती जेनेरिक दवाओं का लाभ नहीं ले पाते थे.  यह भी पढ़े: Paneer Substitutes: महाराष्ट्र में FDA की सख्ती, 1 मई से रेस्टोरेंट्स को मेन्यू में बताना होगा असली पनीर है या चीज

अस्पतालों के लिए जारी मुख्य निर्देश

अस्पतालों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एफडीए ने कई अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने चेतावनी दी है कि यह आदेश केवल एक सलाह नहीं है बल्कि आधिकारिक सरकारी नियम है. इसका उल्लंघन करने वाले या मरीजों पर दबाव बनाने वाले अस्पतालों के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत 'अनुचित व्यापार व्यवहार' (Unfair Trade Practice) का मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्रवाई

मई 2026 में कार्यभार संभालने के बाद से आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में एफडीए ने राज्य भर में एक बड़ा प्रवर्तन अभियान (Enforcement Drive) शुरू किया है. इस व्यापक कार्रवाई के तहत नकली और बिना लाइसेंस वाली दवाओं के व्यापार पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है. उदाहरण के लिए, हाल ही में नागपुर के एक निजी अस्पताल में बिना वैध बिक्री लाइसेंस के असुरक्षित तरीके से रखी गई 20 लाख रुपये की दवाएं जब्त की गईं.

फार्मास्युटिकल क्षेत्र के अलावा, एफडीए खाद्य सुरक्षा मानकों में भी सुधार कर रहा है. इसके तहत सभी रेस्तरां के लिए ग्राहकों को मुफ्त पीने योग्य पानी देना अनिवार्य किया गया है और स्वच्छता के नियमों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है.

आम जनता से सजग रहने की अपील

प्रशासन का मानना है कि दवाओं और खाद्य पदार्थों में मिलावट या नियमों की अनदेखी देश में बढ़ती बीमारियों का एक अदृश्य कारण है. आयुक्त ने नागरिकों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की अपील की है.

यदि कोई अस्पताल पर्ची देने से मना करता है या अपने ही स्टोर से दवा खरीदने का दबाव बनाता है, तो मरीज और उनके रिश्तेदार इसकी शिकायत सीधे स्थानीय एफडीए संभागीय कार्यालय (Local FDA Divisional Office) में दर्ज करा सकते हैं.

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