Arvind Singh Mewar Death: महाराणा प्रताप के वंशज अरविंद सिंह मेवाड़ का 80 साल की उम्र में निधन, सोमवार को होगा अंतिम संस्कार

उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के वंशज अरविंद सिंह मेवाड़ का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया, वे लंबे समय से बीमार थे. मेयो कॉलेज और यूके में पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स के अध्यक्ष और कई ट्रस्टों के प्रमुख के रूप में योगदान दिया. मेवाड़ के 76वें संरक्षक के रूप में, उन्होंने पर्यटन और विरासत संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

Udaipur Royal Family News: राजस्थान के उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के वंशज अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन हो गया है. 80 वर्षीय अरविंद सिंह लंबे समय से बीमार थे और सिटी पैलेस के शंभू निवास में रह रहे थे, जहां उनका इलाज भी चल रहा था. उनके निधन से पूरे मेवाड़ सहित राजस्थान में शोक की लहर है.

राजघराने की परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार

अरविंद सिंह मेवाड़ का अंतिम संस्कार सोमवार को राजघराने की परंपरा के अनुसार किया जाएगा. वे मेवाड़ के महाराणा प्रताप के वंशज थे और भागवत सिंह मेवाड़ तथा सुशीला कुमारी मेवाड़ के छोटे पुत्र थे. उनके बड़े भाई महेन्द्र सिंह मेवाड़ का निधन पिछले साल 10 नवंबर 2024 को हुआ था.

शिक्षा और करियर

अरविंद सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अजमेर के प्रसिद्ध मेयो कॉलेज से प्राप्त की थी. इसके बाद उन्होंने उदयपुर के महाराणा भूपाल कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक किया. उच्च शिक्षा के लिए वे यूके गए, जहां उन्होंने सेंट एल्बंस मेट्रोपॉलिटन कॉलेज से होटल मैनेजमेंट की डिग्री हासिल की.

कुछ समय के लिए उन्होंने अमेरिका में भी नौकरी की थी, लेकिन बाद में वे उदयपुर लौट आए और अपने पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ गए. वे एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक थे. इसके अलावा, वे महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन ट्रस्ट, महाराणा मेवाड़ ऐतिहासिक प्रकाश ट्रस्ट और राजमाता गुलाब कुंवर चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष भी थे.

उदयपुर और मेवाड़ के विकास में योगदान

मेवाड़ राजवंश के 76वें संरक्षक के रूप में, अरविंद सिंह ने उदयपुर और मेवाड़ क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने पर्यटन को बढ़ावा देने, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाई.

उनके निधन के बाद, अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं, और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए जुट रहे हैं. उनका जाना मेवाड़ राजवंश के लिए एक अपूरणीय क्षति है.

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