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बंगाल में तृणमूल के खिलाफ वाम-कांग्रेस एक साथ, 2024 के लोकसभा चुनाव में बनेगी बात?

क्या 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के बीच एकजुटता देखने को मिलेगी? ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ संयुक्त आंदोलन जैसी दोनों ताकतों के नेताओं द्वारा हाल की कुछ पहलों ने पश्चिम बंगाल में दीर्घकालिक कांग्रेस-वाम मोर्चा को करीब ला दिया है.

बंगाल में तृणमूल के खिलाफ वाम-कांग्रेस एक साथ, 2024 के लोकसभा चुनाव में बनेगी बात?
कांग्रेस (Photo Credits: Wikimedia Commons)

कोलकाता, 17 जुलाई : क्या 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के बीच एकजुटता देखने को मिलेगी? ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ संयुक्त आंदोलन जैसी दोनों ताकतों के नेताओं द्वारा हाल की कुछ पहलों ने पश्चिम बंगाल में दीर्घकालिक कांग्रेस-वाम मोर्चा को करीब ला दिया है. शिक्षकों की भर्ती घोटाला एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर कांग्रेस और माकपा दोनों राज्य में एक संयुक्त आंदोलन शुरू करना चाहते हैं. यह प्रस्ताव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने रखा था. चौधरी ने कहा, "हम चाहते हैं कि वामपंथी दल हमारे साथ मिलकर पूरे राज्य में एक जन आंदोलन आयोजित करें. इसे एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा."

माकपा के राज्य सचिव और पार्टी पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम के अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों में शिक्षकों की भर्ती में अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन आंदोलन अत्यधिक असंगठित है. सलीम ने कहा, "पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग, पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड और पश्चिम बंगाल लोक सेवा आयोग की भर्ती में भारी गड़बड़ी हुई है. इन असंगठित आंदोलनों को एक छत्र के नीचे लाने की तत्काल आवश्यकता है और इस उद्देश्य के लिए हम इस मुद्दे पर कांग्रेस-वाम मोर्चा संयुक्त आंदोलन के प्रस्ताव का स्वागत करते हैं." यह भी पढ़ें : MP Urban Body Election Result Live: यहां देखिये मध्य प्रदेश नगर निगम चुनाव के सबसे तेज नतीजें, भाजपा को झटका, ओवैसी का खुला खाता

इस संयुक्त आंदोलन को लंबे समय में अधिक चुनाव व्यवस्था की नींव के रूप में देखे जाने पर सलीम ने कहा, वे सभी राजनीतिक ताकतों को फोन कर रहे हैं, जो भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों के खिलाफ हैं. इस संयुक्त आंदोलन पहल के पीछे बड़े राजनीतिक समीकरण को देखने का कोई कारण नहीं है. चौधरी ने यह भी कहा कि यह दीर्घकालिक राजनीतिक समीकरण पर विचार का विषय नहीं है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए बहुत समय बचा है. राजनीतिक विश्लेषक अमल कुमार मुखोपाध्याय के अनुसार, संयुक्त आंदोलन को लेकर कांग्रेस और वाम मोर्चा द्वारा राज्य में ताकत हासिल करने के लिए एकजुट हो सकते हैं. दोनों के पास विधानसभा में सदस्यों की संख्या शून्य है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 17, 2022 12:04 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).