Ladki Bahin Yojana: गणपति बप्पा के आगमन के बीच क्या आज जारी होगी अगस्त महीने की ₹1,500 किस्त? जानें ताजा अपडेट

'माझी लाडकी बहिन योजना' के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है.

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Ladki Bahin Yojana: सोमवार, 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी और गणपति बप्पा के आगमन के साथ ही महाराष्ट्र की लाखों लाभार्थी महिलाएं 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' की अगली किस्त का इंतजार कर रही हैं. त्योहार के अवसर पर कई स्तरों पर चर्चा है कि राज्य सरकार अगस्त महीने की 1,500 रुपये की किस्त बैंक खातों में हस्तांतरित कर सकती है. हालांकि, महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आज ही किस्त जारी करने संबंधी कोई आधिकारिक तिथि की घोषणा नहीं की गई है.

डीबीटी (DBT) के जरिए चरणबद्ध तरीके से ट्रांसफर होगी राशि

'माझी लाडकी बहिन योजना' के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है.  यह भी पढ़े:  Ladki Bahin Yojana July Installment: लाडकी बहीन योजना की जुलाई किस्त खाते में आनी शुरू, अब महिलाओं को अगस्त की ₹1,500 किस्त का इंतजार

महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रक्रियात्मक नियमों के अनुसार, फंड मंजूर होने और प्रशासनिक सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र लाभार्थियों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं. पूर्व के भुगतानों की तरह ही, सत्यापन के बाद पात्र महिलाओं के खातों में राशि चरणबद्ध तरीके से पहुंचाई जाएगी.

ई-केवाईसी (e-KYC) और बैंक लिंकिंग अनिवार्य

योजना का लाभ बिना किसी रुकावट के प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार ने सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त किया है. यदि किसी पात्र महिला के खाते में किस्त जमा नहीं होती है, तो इसके पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हो सकते हैं:

आधिकारिक पोर्टल पर भुगतान स्थिति जांचने का तरीका

लाभार्थी महिलाएं अपने आवेदन और भुगतान का स्टेटस जांचने के लिए आधिकारिक वेबसाइट ladakibahin.maharashtra.gov.in पर जाकर पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉगिन कर सकती हैं. इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से भी डीबीटी ट्रांसफर की स्थिति ट्रैक की जा सकती है.

प्रशासन ने लाभार्थियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अनधिकृत तारीखों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक सरकारी संचार और विभागीय बयानों पर ही ध्यान दें.

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