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Ladki Bahin Yojana Row: लाडकी बहन योजना पर महाराष्ट्र में सियासत गरमाई, शिवसेना UBTने लगाया गड़बड़ी का आरोप, बॉम्बे हाईकोर्ट से जांच कराने की मांग की

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना' को लेकर तीखा हमला बोला है. पार्टी ने योजना के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इस पूरे मामले की जांच हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश (सिटिंग जज) से कराने की मांग की है.

Ladki Bahin Yojana Row: लाडकी बहन योजना पर महाराष्ट्र में सियासत गरमाई, शिवसेना UBTने लगाया गड़बड़ी का आरोप, बॉम्बे हाईकोर्ट से जांच कराने की मांग की
(File Photo)

Ladki Bahin Yojana Row: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना' को लेकर तीखा हमला बोला है. पार्टी ने योजना के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इस पूरे मामले की जांच हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश (सिटिंग जज) से कराने की मांग की है. शिवसेना (यूबीटी) का आरोप है कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए बिना उचित जांच के सरकारी धन का वितरण किया गया.

e-KYC के बाद 80 लाख महिलाएं हुईं अपात्र

पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में बुधवार को प्रकाशित एक संपादकीय में दावा किया गया कि ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापन प्रक्रिया के बाद करीब 80 लाख महिलाओं को इस योजना के लिए अपात्र पाया गया है. इस खुलासे के बाद सरकार की स्क्रीनिंग और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. विपक्ष का पूछना है कि पात्रता की पूरी जांच किए बिना इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों को वित्तीय सहायता कैसे जारी कर दी गई?

चुनाव को प्रभावित करने के लिए जल्दबाजी का आरोप

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस योजना को पेश किया था. इसके तहत राज्य भर की महिला लाभार्थियों को 1,500 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई थी. शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि चुनाव के समय बिना जांच के पैसे बांटे गए और अब चुनाव खत्म होने के बाद इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को अपात्र घोषित करना प्रशासनिक और नीतिगत विफलता को दर्शाता है.

सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर उठ रहे हैं सवाल

विपक्ष ने इस बात पर चिंता जताई है कि जनता के पैसे को बिना किसी ठोस प्रक्रिया के ऐसे लोगों में भी बांट दिया गया जो बाद में अपात्र पाए गए. सामना के जरिए मांग की गई है कि इस योजना के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. यदि जांच में कोई गड़बड़ी साबित होती है, तो योजना की रूपरेखा तैयार करने वाले और इसे लागू करने वाले सरकारी तंत्र पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, न कि उन महिलाओं पर जो इसकी लाभार्थी बनीं.

चुनाव आयोग की भूमिका पर भी उठाए सवाल

शिवसेना (यूबीटी) ने इस कल्याणकारी योजना को सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव के नतीजों से जोड़ा है. पार्टी का दावा है कि इस वित्तीय सहायता योजना ने मतदाताओं के व्यवहार को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभाई. संपादकीय में चुनाव आयोग की आलोचना भी की गई है. पार्टी का आरोप है कि चुनाव के दौरान इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर जो चिंताएं और शिकायतें उठाई गई थीं, उन पर संवैधानिक प्राधिकारियों ने सही तरीके से ध्यान नहीं दिया.

महायुति सरकार का रुख

दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन लगातार लाडकी बहीण योजना का बचाव करता रहा है. सरकार का कहना है कि यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई एक बेहद महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है. हालांकि, विपक्ष के इन ताजा और कड़े आरोपों के बाद राज्य में कल्याणकारी योजनाओं के खर्च, लाभार्थियों के सत्यापन और उनकी स्थिरता को लेकर राजनीतिक घमासान और तेज होने के आसार हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 03, 2026 12:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).