Kerala: वायनाड लैंडस्लाइड हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हुई, 1 अब भी लापता; सुरंग परियोजना को लेकर छिड़ा सियासी घमासान

केरल के वायनाड में टनल रोड परियोजना स्थल के पास हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर सात हो गई है. मलबे से एक और शव बरामद किया गया है, जबकि एक अन्य लापता व्यक्ति की तलाश जारी है. इस बीच, हादसे को लेकर राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है.

वायनाड लैंडस्लाइड हादसा (Photo Credits: IANS)

कलपेट्टा (केरल): केरल (Kerala) के वायनाड (Wayanad) में निर्माणाधीन महत्वाकांक्षी सुरंग मार्ग (टनल रोड) परियोजना स्थल पर हुए भीषण भूस्खलन (Landslide) (कीचड़ धंसने/लैंडस्लाइड) हादसे में मरने वालों की संख्या शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को बढ़कर सात हो गई है. बचाव दलों ने आज मलबे के नीचे से एक और शव बरामद किया है. वहीं, खराब मौसम और बेहद दुर्गम व फिसलन भरे इलाके के बीच अभी भी एक लापता व्यक्ति को तलाशने के लिए व्यापक खोज अभियान चलाया जा रहा है. दूसरी तरफ, जैसे-जैसे रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, इस हादसे ने राज्य के राजनीतिक हलकों में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें प्रोजेक्ट की मंजूरी और सुरक्षा मानकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं. यह भी पढ़ें: Wayanad Landslide: केरल के वायनाड में टनल प्रोजेक्ट साइट पर भूस्खलन, मलबे की चपेट में आने से 5 लोग घायल; NDRF तैनात (Watch Videos)

खराब मौसम और ढीली मिट्टी के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को मिला शव राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दमकल एवं बचाव सेवा (Fire and Rescue Services), स्थानीय पुलिस, वन विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों की संयुक्त और गहन तलाशी के बाद निकाला जा सका. यह हादसा कल्लाडी में मीनाक्षी ब्रिज (Meenakshi Bridge) के पास हुआ, जहां टनल रोड प्रोजेक्ट के वायनाड छोर का काम चल रहा था.

इससे पहले गुरुवार तक मलबे से तीन और शव निकाले जाने के बाद मृतकों की संख्या छह थी. मलबे को साफ करने के लिए भारी खुदाई मशीनों (एक्स्कवेटर) और आधुनिक उपकरणों को लगाया गया है. हालांकि, क्षेत्र में हो रही रुक-रुक कर भारी बारिश और पहाड़ों से लगातार खिसक रही गीली मिट्टी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी बाधा आ रही है.

मुख्यमंत्री ने बैठाई जांच, केरल हाई कोर्ट ने भी मांगा जवाब

इस मानवीय त्रासदी के बाद अब यह पूरा प्रोजेक्ट कानूनी और प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है. केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने घोषणा की है कि विशेषज्ञों की एक विशेष टीम इस टनल रोड प्रोजेक्ट के सभी पहलुओं की व्यापक जांच (कम्प्रीहेंसिव प्रोब) करेगी. यह टीम मुख्य रूप से इस बात की जांच करेगी कि क्या निर्माण के दौरान आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया गया था या नहीं, और क्या प्रशासनिक स्तर पर हुई किसी बड़ी चूक के कारण यह हादसा हुआ.

इसके साथ ही, यह मामला न्यायिक जांच के दायरे में भी पहुंच गया है. केरल हाई कोर्ट ने इस पूरी घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.

प्रोजेक्ट की मंजूरी को लेकर आमने-सामने आए नेता

हादसे के बाद इस प्रोजेक्ट के पर्यावरणीय और तकनीकी मंजूरी को लेकर तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है. विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, जिनके कार्यकाल के दौरान इस वर्ष की शुरुआत में इस टनल प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी, ने गुरुवार को पूरी मंजूरी प्रक्रिया का पुरजोर बचाव किया. उन्होंने दावा किया कि परियोजना को हरी झंडी देने से पहले सभी वैधानिक प्रोटोकॉल और अनिवार्य सरकारी प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन किया गया था.

विजयन के इस बयान पर दुर्घटना स्थल पर डेरा डाले हुए राजस्व मंत्री (Revenue Minister) ए.पी. अनिल कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने विजयन द्वारा जांच पूरी होने से पहले ही किसी भी चूक से इनकार करने पर सवाल उठाए. अनिल कुमार ने कहा, "उन्हें निष्कर्षों पर पहुंचने की इतनी जल्दी क्यों है? पहले विशेषज्ञ समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने दें. हम उसकी रिपोर्ट और फाइंडिंग्स के आधार पर ही आगे की सख्त कार्रवाई करेंगे."

विशेषज्ञों और कोर्ट की इस दोहरी निगरानी से यह साफ होगा कि क्या यह हादसा पूरी तरह से एक प्राकृतिक आपदा था, या फिर संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में बिना पुख्ता सुरक्षा उपायों के किए जा रहे निर्माण कार्यों और प्रशासनिक विफलताओं का नतीजा था.

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