Kedarnath Opening Date 2026: केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल से खुलेंगे, महाशिवरात्रि पर बाबा के दर्शन की डेट की हुई घोषणा

उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा कर दी गई है. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में पंचांग गणना के बाद तय हुआ कि बाबा केदार के द्वार 22 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे

 Kedarnath Opening Date 2026:  विश्व प्रसिद्ध 11वें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट खुलने का इंतजार कर रहे करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर है. रविवार, 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर बाबा केदार के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की गई. पंचांग गणना के अनुसार, केदारनाथ धाम के द्वार 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8:00 बजे 'वृष लग्न' में पूरे विधि-विधान के साथ खोल दिए जाएंगे.  यह भी पढ़े:  Kedarnath Temple: केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद कहां विराजमान होते हैं बाबा केदार? 6 महीने तक इस खास स्थल पर होती है पूजा

डोली प्रस्थान का पूरा कार्यक्रम

कपाट खुलने से पहले भगवान शिव की पंचमुखी डोली अपने शीतकालीन प्रवास से प्रस्थान करेगी. मंदिर समिति द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार:

प्रशासन ने तेज कीं तैयारियां

कपाट खुलने की तिथि तय होते ही उत्तराखंड प्रशासन और बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन के अनुसार, गौरीकुंड से केदारनाथ तक के 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग से बर्फ हटाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. अधिकारियों का कहना है कि यात्रा शुरू होने से पहले पेयजल, बिजली, और स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त कर लिया जाएगा ताकि तीर्थयात्रियों को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े.

पंजीकरण और यात्रा गाइडलाइंस

चारधाम यात्रा 2026 के लिए अनिवार्य पंजीकरण की प्रक्रिया मार्च के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है. राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे आधिकारिक पोर्टल (registrationandtouristcare.uk.gov.in) के माध्यम से ही अपना पंजीकरण कराएं. अत्यधिक ऊंचाई और ठंड को देखते हुए यात्रियों को अपनी स्वास्थ्य जांच कराने और गर्म कपड़े साथ रखने की सलाह दी गई है.

धार्मिक और आर्थिक महत्व

छह महीने की शीतकालीन अवधि के दौरान भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद रहते हैं, जिस दौरान भगवान की पूजा उखीमठ में की जाती है. केदारनाथ यात्रा न केवल करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह गढ़वाल क्षेत्र की आर्थिकी की रीढ़ भी है. होटल व्यवसायियों, घोड़ा-खच्चर संचालकों और स्थानीय व्यापारियों ने भी अब आगामी सीजन के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं.

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