Karnataka HC: यूट्यूबर 'ड्रोन प्रताप' के खिलाफ दर्ज FIR रद्द; हाईकोर्ट ने सोडियम विस्फोट वीडियो को माना शैक्षणिक, कहा- 'नहीं था दुर्भावनापूर्ण इरादा'
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लोकप्रिय यूट्यूबर प्रताप एनएम, जिन्हें 'ड्रोन प्रताप' के नाम से जाना जाता है, के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले और एफआईआर को रद्द कर दिया है. प्रताप के खिलाफ एक निजी फार्म में बने कृत्रिम तालाब में 100 ग्राम सोडियम डालकर रासायनिक विस्फोट का वीडियो फिल्माने और उसे यूट्यूब पर पोस्ट करने के आरोप में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था.
बेंगलुरु: सोशल मीडिया पर विज्ञान प्रयोगों के वीडियो बनाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट का एक अहम फैसला सामने आया है. Bar and Bench की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने मशहूर यूट्यूबर प्रताप एनएम उर्फ 'ड्रोन प्रताप' के खिलाफ कृत्रिम तालाब में सोडियम ब्लास्ट का वीडियो बनाने पर दर्ज आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि एक शिक्षक और कंटेंट क्रिएटर द्वारा सार्वजनिक रूप से विज्ञान का प्रयोग दिखाने को अपराध मानकर आपराधिक मुकदमे की जलालत से गुजारना उचित नहीं है.
क्या था पूरा मामला? 100 ग्राम सोडियम से तालाब में धमाका
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब दिसंबर 2024 में ड्रोन प्रताप ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक विज्ञान प्रयोग का वीडियो साझा किया था:
- प्रयोग का विवरण: वीडियो में प्रताप ने पानी के साथ सोडियम धातु की तीव्र रासायनिक प्रतिक्रिया को प्रदर्शित करने के लिए 100 ग्राम सोडियम को एक कृत्रिम तालाब में फेंक दिया था.
- पानी के संपर्क में आते ही सोडियम में जोरदार विस्फोट हुआ और आग की लपटें उठीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.
- पुलिस कार्रवाई: वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस ने संज्ञान लेते हुए प्रताप को गिरफ्तार कर लिया था. उनके खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 (Explosive Substances Act) की धारा 3 (जीवन या संपत्ति को खतरे में डालने वाला विस्फोट) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 288 (विस्फोटक पदार्थों के संबंध में लापरवाही भरा आचरण) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
- कुछ समय न्यायिक हिरासत में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली थी, जिसके बाद उन्होंने अपने चैनल से वह वीडियो हटा दिया और एफआईआर रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंचे.
बचाव पक्ष की दलील: निजी फार्म पर सुरक्षा उपायों के साथ प्रयोग
हाईकोर्ट में प्रताप की ओर से पेश अधिवक्ता श्वेता चिदानंद हत्तारकी ने अदालत को स्पष्ट किया:
- यह प्रयोग किसी सार्वजनिक स्थल या प्राकृतिक जलस्रोत में नहीं, बल्कि उनके एक मित्र के निजी फार्म पर बनाए गए कृत्रिम तालाब में किया गया था.
- प्रयोग के दौरान जरूरी सुरक्षात्मक दूरी और सावधानियां बरती गई थीं.
- इसका एकमात्र उद्देश्य छात्रों और दर्शकों को सोडियम और पानी के बीच होने वाले रासायनिक प्रभाव (Exothermic Reaction) को व्यावहारिक रूप से दिखाना था.
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां: "यह दुर्भावना नहीं, शिक्षा का प्रयास था"
LatestLY की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने प्रताप की पृष्ठभूमि और वीडियो के उद्देश्य का गहन मूल्यांकन किया:
- NCERT सिलेबस का संदर्भ: न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने उल्लेख किया कि सोडियम और जल की रासायनिक प्रतिक्रिया कक्षा 10वीं के एनसीईआरटी पाठ्यक्रम का एक सामान्य हिस्सा है.
- क्रिएटर का ट्रैक रिकॉर्ड: पीठ ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि याचिकाकर्ता एक शिक्षक और प्रवर्तक हैं, जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) का उपयोग करके 600 से अधिक ड्रोन तैयार किए हैं.
- साक्ष्य छिपाने का अभाव: अदालत ने कहा कि यूट्यूब पर वीडियो को सार्वजनिक रूप से अपलोड करना यह सिद्ध करता है कि याचिकाकर्ता का इरादा किसी अपराध को छिपाने या किसी को नुकसान पहुंचाने का नहीं था.
- अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा, "यद्यपि यह अदालत याचिकाकर्ता द्वारा प्रयोग किए जाने के तरीके की सराहना या समर्थन नहीं करती, लेकिन तथ्य यही है कि यह कोई दुर्भावनापूर्ण कार्य नहीं बल्कि एक शैक्षणिक कार्य था, जिसके लिए किसी शिक्षक को आपराधिक जांच और मुकदमे की बदनामी से गुजारना आवश्यक नहीं है."
भविष्य के लिए सख्त चेतावनी
अदालत ने विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज मामले को रद्द करते हुए प्रताप को भविष्य के लिए सख्त चेतावनी भी दी:
- पीठ ने स्पष्ट किया कि यद्यपि इस मामले में उन्हें राहत दी जा रही है, लेकिन भविष्य में यदि याचिकाकर्ता द्वारा इस तरह के जोखिम भरे या गैर-जिम्मेदाराना स्टंट दोहराए गए, तो कानून उनके खिलाफ बेहद सख्ती से निपटेगा।
- अदालत के इस फैसले से विज्ञान आधारित शैक्षिक वीडियो बनाने वाले डिजिटल क्रिएटर्स को बड़ी कानूनी राहत मिली है.