वेनेजुएला में मृत भारतीय नागरिक के शव से भीतरी अंग गायब, परिवार परेशान

भारतीय नाविक राकेश चौहान की मौत और शव से गायब अंग, मर्चेंट नेवी की आड़ में चल रही स्याह दुनिया की परतें खोल सकते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारतीय नाविक राकेश चौहान की मौत और शव से गायब अंग, मर्चेंट नेवी की आड़ में चल रही स्याह दुनिया की परतें खोल सकते हैं.अभी दो महीने पहले वेनेजुएला में राकेश चौहान नाम के एक भारतीय नाविक की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी. परिजनों को बताया गया कि 32 साल के राकेश की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. करीब एक महीने बाद राकेश के परिजनों को जब उनका शव मिला और उसका पोस्टमॉर्टम हुआ तो परिजनों के होश उड़ गए.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि राकेश चौहान के शरीर के तमाम अंदरूनी अंग, मसलन- दिमाग, फेफड़े, दिल, लीवर, किडनी गायब हैं. नाविकों की संस्था फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने भी यह जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट की है.

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यूपी के देवरिया जिले के डॉक्टरों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राकेश चौहान के शव पर पहले से ही कई टांके लगे हुए थे. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, गर्दन से प्यूबिक सिम्फाइसिस यानी कमर तक 22 टांके और सिर में 21 टांके लगे हुए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, मौत से पहले शरीर पर किसी चोट के स्पष्ट निशान का जिक्र नहीं है और शव को करीब एक महीने तक डीप फ्रीजर में रखा गया था. शरीर के प्रमुख अंग गायब होने की वजह से मौत के वास्तविक कारण का पता नहीं चल सका.

क्या है नाविक राकेश चौहान से जुड़ा पूरा मामला?

राकेश चौहान उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले थे. नवंबर 2025 में उन्होंने मर्चेंट नेवी ज्वॉइन की थी और वह वेनेजुएला में मरीन फिटर के रूप में काम कर रहे थे. राकेश को जहाज पर भेजने वाली कंपनी का नाम एक्सफिनिटी है. राकेश चौहान के परिजनों के मुताबिक सात मई को कंपनी की ओर से ही फोन आया और बताया गया कि राकेश जहाज पर गिर गए हैं और उन्हें गंभीर चोटें आई हैं. अगले दिन फिर फोन आया और बताया गया कि उनके बचने की संभावना बहुत कम है.

डीडब्ल्यू से बातचीत में राकेश चौहान की पत्नी रजनी कहती हैं, "सुबह कहा गया कि राकेश के बचने की संभावना बहुत कम है और फिर शाम को कंपनी ने राकेश की मौत की सूचना दी. उन लोगों का कहना था कि चक्कर आने की वजह से राकेश गिर गए. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन इलाज के दौरान हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई.”

FSUI ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि राकेश चौहान का शव वेनेजुएला के अधिकारियों ने बिना किसी जांच रिपोर्ट और विवरण के देवरिया स्थित उनके घर पर भेज दिया, इसी वजह से जांच और पोस्टमॉर्टम की मांग की गई. पोस्ट में कहा गया है, "यह स्वीकार्य नहीं है, नाविकों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है. हम मांग करते हैं कि वेनेजुएला के अधिकारियों की पूरी जांच की जाए और जवाबदेही तय की जाए, वेनेजुएला में भारतीय दूतावास तुरंत हस्तक्षेप करे और पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मौत के हालात और परिवार को न्याय और मुआवजा सुनिश्चित किया जाए.”

वेनेजुएला के अधिकारियों की लापरवाही

राकेश चौहान के परिजनों का कहना है कि राकेश का शव भारत पहुंचने के बाद डॉक्टरों की टीम ने उसका परीक्षण तो किया, लेकिन पोस्टमॉर्टम नहीं किया क्योंकि बताया गया था कि पोस्टमॉर्टम वेनेजुएला में पहले ही हो चुका है. लेकिन उसकी कोई रिपोर्ट या विवरण न होने के बाद परिजनों ने जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी. इसके बाद देवरिया के जिलाधिकारी मधुसूदन हुलगी के निर्देश पर पोस्टमॉर्टम कराया गया.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर के तमाम अंदरूनी अंग तो गायब मिले ही, विसरा भी नहीं मिला जिसके कारण फॉरेंसिक जांच भी संभव नहीं हो सकी.

राकेश चौहान की पत्नी रंजना सिंह कहती हैं कि यह एक सोची-समझी साजिश है, "वहां के अधिकारियों की बात पर हमें बिल्कुल भरोसा नहीं है. उनकी हत्या की गई है और अंग चोरी कर लिए गए. इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और हमें मुआवजा दिया जाए.”

राकेश चौहान परिवार में कमाने वाले अकेले व्यक्ति थे. उनकी मौत के बाद छह महीने के बच्चे और बीमार ससुर की जिम्मेदारी अब उनकी पत्नी रंजना पर है. रंजना का यह भी आरोप है कि शव प्राप्ति की रसीद में उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं. इसके अलावा एम्प्लॉयमेंट एग्रीमेंट में जिस जहाज का नाम था, राकेश की तैनाती उससे अलग जहाज पर दिखाई गई है.

साजिश की आशंका

इस मामले को शुरू से ही कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार रोहित पांडेय नाविकों और समुद्री गतिविधियों पर केंद्रित एक पत्रिका के संपादक हैं. रोहित पांडेय घटना के बाद से ही राकेश चौहान के परिवार, कंपनी और संबंधित विभागों के संपर्क में हैं. डीडब्ल्यू से बातचीत में रोहित पांडेय कहते हैं कि ऐसी तमाम बातें हैं जो इस मामले में गड़बड़ी और संभावित साजिश की ओर इशारा करती हैं.

रोहित पांडेय कहते हैं, "व्यावसासायिक जहाजों पर भारतीय नाविकों की नियुक्ति मुख्य रूप से RPSL यानी रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से की जाती है. इन एजेंसियों को जहाजरानी महानिदेशक द्वारा स्पष्ट प्रावधानों के अनुरूप लाइसेंस प्रदान किया जाता है. केवल अधिकृत RPSL एजेंसियां ही भारतीय और विदेशी शिपिंग कंपनियों के लिए भारतीय नाविकों की वैध भर्ती कर सकती हैं.”

रोहित पांडेय के मुताबिक, "भर्ती के समय प्रत्येक नाविक और शिपिंग कंपनी के बीच SEA अर्थात नाविक रोजगार अनुबंध किया जाता है. यह एक कानूनी दस्तावेज है जिसमें पद, वेतन, अनुबंध की अवधि, कार्य एवं विश्राम के घंटे, चिकित्सा सुविधा, बीमा और मुआवजा तथा दोनों पक्षों के अधिकार और दायित्व स्पष्ट रूप से निर्धारित होते हैं.”

क्या कहता है कानून?

रोहित बताते हैं कि RPSL एजेंसियों का दायित्व सिर्फ भर्ती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि नाविक को पारदर्शी और वैध रोजगार मिले, उससे किसी प्रकार की अवैध वसूली न की जाए, SEA की सभी शर्तों की पहले से ही जानकारी दी जाए तथा उसके अधिकारों की रक्षा की जाए. इन प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में जहाजरानी महानिदेशालय संबंधित RPSL एजेंसी के विरुद्ध जांच, निलंबन, लाइसेंस रद्द करने सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई कर सकता है.

घटना को लेकर राकेश चौहान की नियोक्ता कंपनी एक्सफिनिटी से भी संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन कंपनी के किसी जिम्मेदार व्यक्ति से बात नहीं हो पाई. वहीं जहाजरानी मंत्रालय के अधिकारियों की तरफ से भी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन बताया जा रहा है कि घटना को बहुत गंभीरता से लिया गया है और दूतावास के जरिए पूरे मामले की जानकारी ली जा रही है.

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