Wrong Money Transfer: UPI से गलत अकाउंट में भेज दिए हैं पैसे, जानिए कैसे मिलेगा वापस
लोग जल्दबाजी में गलती से किसी और के बैंक खाते में पैसा भेज देते हैं. अगर आपके द्वारा भी कभी इस तरह की गलती होती है तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.
Wrong Money Transfer: यूपीआई (UPI) के आने से कहीं पैसे भेजने या किसी से मंगाना एकदम सिंपल हो गया है. इसके साथ ही कुछ जोखिम भी बढ़ गए हैं. एक डिजिट की गड़बड़ी हुई और आपका पैसा गलत खाते में चला जाता है. 7th Pay Commission: पेंशनधारकों के लिए बड़ी खबर! केंद्र सरकार ने महंगाई राहत पर दी बड़ी अपडेट
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के मुताबिक, अगर आपने किसी गलत खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया है तो, तो उसको वापस भी लिया जा सकता है. इसके लिए आपको भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के पास गलत यूपीआई ट्रांजैक्शन (Wrong UPI Transaction) की शिकायत भी कर सकते हैं.
ऐसे करें शिकायत
- सबसे पहले एनपीसीआई के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं.
- इसके बाद शिकायत वाले अनुभाग में जाएं.
- फिर ट्रांजेक्शन की प्रकृति चुने.
- इसके बाद ड्रॉप डाउन सूची से अपनी समस्या का चयन करें.
- फिर अपनी समस्या के बारे में संक्षिप्त जानकारी दें., जो 500 से अधिक कैरेक्टर नहीं होना चाहिए.
- इसके बाद नीचे टिप्पणी वाले सेक्शन, अपना ट्रांजेक्शन रिफ्रेंस नंबर दर्ज करें, यह संख्या 1, 7, 8, 9 या 0 से शुरू होता हैं.
- अब ड्रॉप-डाउन सूची से बैंक का चयन करें.
- इसके बाद आप अपना बीपीए सेक्शन में अपना वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (बीपीए) दर्ज करें.
- बीपीए दर्ज करने के बाद प्रदान की गई राशि वाले अनुभाग में अगर-अलग रूपये और पैसे को दर्ज करें.
- इसके बाद आप लेन देन की तिथि, ईमेल एड्रेस, मोबाइल नंबर समेत सभी जानकारी दर्ज करें.
- अपने डिवाइस के अपडेटेड बैंक स्टेटमेंट को चुने और इसे अपलोड करें. अपने द्वारा दी गई सभी जानकारी को ठीक से चेक करें और सबमिट पर क्लिक करें.
अगर यूपीआई आईडी नहीं है, तो ?
मान लीजिए आप किसी ऐसे UPI ID पर पैसे भेजते हैं जो मौजूद नहीं है तो ऐसे में क्या होगा. यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो आपका पैसा अपने आप आपके खाते में वापस भेज दिया जाएगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 31, 2022 03:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

