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Talrop Layoffs: टालरोप के इम्प्लाई संकट में, छंटनी के बीच बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने महीनों से सैलरी न मिलने का लगाया आरोप

कोच्चि मुख्यालय वाली कंपनी 'टालरोप' (Talrop) के लगभग 300 कर्मचारी नौकरी जाने और पिछले कई महीनों से वेतन का भुगतान न होने के कारण गहरे वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं. कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी के हालिया पुनर्गठन से काफी पहले ही सैलरी में देरी का सिलसिला शुरू हो गया था.

Talrop Layoffs: टालरोप के इम्प्लाई संकट में, छंटनी के बीच बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने महीनों से सैलरी न मिलने का लगाया आरोप
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

Talrop Layoffs: केरल के कोच्चि में मुख्यालय वाले प्रसिद्ध स्टार्टअप इकोसिस्टम डेवलपमेंट और बीओटी (Build-Operate-Transfer) कंपनी टालरोप (Talrop) के लगभग 300 से अधिक कर्मचारियों के सामने अचानक आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. कंपनी द्वारा बड़े पैमाने पर की गई हालिया छंटनी और पिछले कई महीनों से वेतन के भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण पूर्व और वर्तमान कर्मचारी गहरे वित्तीय दबाव में हैं. प्रभावित कर्मचारियों का आरोप है कि आधिकारिक छंटनी प्रक्रिया शुरू होने के काफी महीने पहले से ही वेतन मिलने में दिक्कतें आ रही थीं, जिससे उनके लिए व्यक्तिगत खर्चों को संभालना बेहद मुश्किल हो गया है.

बार-बार वादे के बाद भी नहीं मिला बकाया वेतन

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, टालरोप के विभिन्न विभागों में पिछले कई महीनों से स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी. कई कर्मचारियों को प्रबंधन द्वारा खुद इस्तीफा देने के लिए कहा गया, जबकि कुछ को सूचित किया गया कि पुनर्गठन (Restructuring) के कारण उनके पदों को समाप्त किया जा रहा है.  यह भी पढ़े: Microsoft Layoffs: माइक्रोसॉफ्ट में फिर छंटनी की तैयारी, Xbox, सेल्स और कंसल्टिंग विभागों में जा सकती है हजारों कर्मचारियों की नौकरियां

पूर्व कर्मचारियों का दावा है कि कंपनी प्रबंधन ने बार-बार आश्वासन दिया था कि 31 मई तक उनका सारा बकाया वेतन और फंड क्लियर कर दिया जाएगा. हालांकि, कई बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद यह वादा अधूरा ही रहा, जिससे कर्मचारियों की चिंताएं और वित्तीय परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती चली गईं.

विभिन्न सब्सिडियरी कंपनियों में ट्रांसफर और गृहनगर वापसी

प्रभावित कर्मचारियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें टालरोप समूह के भीतर ही अलग-अलग सिस्टर कंपनियों (जैसे कि डेवलपर्स पर केंद्रित स्टार्टअप 'रिबोस') में ट्रांसफर किया गया था. लेकिन नई जगह पर भी वेतन में देरी का वही पुराना सिलसिला जारी रहा.

मई के अंत तक कई कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से नौकरी के नए विकल्प तलाशने की सलाह दे दी गई. लंबे समय तक बिना वेतन के कोच्चि जैसे शहर में रहने और खाने-पीने का खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण, कई तकनीकी पेशेवरों को अपने गृहनगर लौटने पर मजबूर होना पड़ा. वे अब घर से काम (Remote Work) करते हुए अपने रुके हुए पैसों का इंतजार कर रहे हैं.

प्रबंधन से स्पष्टीकरण और तुरंत भुगतान की मांग

सभी प्रभावित कर्मचारी अब टालरोप के शीर्ष नेतृत्व से तत्काल आधिकारिक संवाद और अपने बकाए वेतन को जारी करने की मांग कर रहे हैं. टालरोप के इस मौजूदा संकट ने एक बार फिर भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में कर्मचारियों की सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और कॉरपोरेट पुनर्गठन के दौरान मिलने वाले कानूनी अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. टालरोप के प्रबंधन की ओर से फिलहाल इस मामले पर कोई विस्तृत औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 12, 2026 11:09 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).