कोच्चि में Amoebic Meningoencephaliti का मामला, जानें कैसे यह संक्रमण बन सकता है मौत का कारण

केरल के कोच्चि में खतरनाक और दुर्लभ ब्रेन इंफेक्शन अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (Amoebic Meningoencephalitis) का मामला सामने आया है. यह संक्रमण एक 25 वर्षीय युवती में पाया गया है, जो मूल रूप से लक्षद्वीप की रहने वाली है और कोच्चि के एक हॉस्टल में रह रही थी.

Representational Image | Pixabay

केरल के कोच्चि में खतरनाक और दुर्लभ ब्रेन इंफेक्शन अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (Amoebic Meningoencephalitis) का मामला सामने आया है. यह संक्रमण एक 25 वर्षीय युवती में पाया गया है, जो मूल रूप से लक्षद्वीप की रहने वाली है और कोच्चि के एक हॉस्टल में रह रही थी. युवती को बुखार और तेज सिरदर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. शुरुआती दो रिपोर्ट नेगेटिव थीं, लेकिन तीसरी जांच में संक्रमण की पुष्टि हो गई. अच्छी खबर यह है कि फिलहाल मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है और वह रिकवरी की ओर है.

मौतों का आंकड़ा भी डराने वाला

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस साल अब तक 153 मामले और 33 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं. हाल ही में कोल्लम जिले में 65 वर्षीय महिला की इस संक्रमण से मौत हुई थी. इतनी मौतें यह साबित करती हैं कि यह बीमारी भले ही दुर्लभ हो, लेकिन बेहद घातक है.

संक्रमण कैसे फैलता है?

ICMR की एक विशेष टीम इस संक्रमण के स्त्रोत की पहचान के लिए केरल के चार जिलों कोझिकोड, मलप्पुरम, तिरुवनंतपुरम और कोल्लम में सर्वे कर रही है. कुछ मामलों में देखा गया है कि संक्रमित लोगों ने तालाब या झील के पानी से घाव धोए थे. हालांकि, कई बिस्तर पर पड़े मरीजों में स्रोत अभी भी अज्ञात है, जिससे चिंता और बढ़ जाती है.

क्या है अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस?

यह एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत गंभीर ब्रेन इंफेक्शन है, जो कुछ खास प्रकार के अमीबा जैसे Naegleria fowleri, Acanthamoeba, Sappinia और Balamuthia से होता है.

यह अमीबा आमतौर पर गंदे या ठहरे हुए पानी में पाया जाता है. पानी में मौजूद अमीबा नाक के जरिए दिमाग तक पहुंचकर सूजन पैदा करता है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसकी मृत्यु दर 97% से भी ज्यादा है. यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता.

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

संक्रमण के 1 से 9 दिन के भीतर दिखाई देने वाले लक्षण:

PCR टेस्ट के द्वारा स्पाइनल फ्लुइड की जांच से इसकी पुष्टि की जाती है. इलाज में 5 तरह की एंटी-अमीबिक दवाओं का संयोजन दिया जाता है. समय से उपचार मिल जाए तो बचाव संभव है.

कैसे बचें? सावधानी ही सुरक्षा

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यदि लोग सावधानी बरतें और समय पर इलाज मिले, तो इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

Share Now

\