Income Tax Rules Amended: CBDT ने रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई, गिरफ्तारी के प्रावधान हटाए
इसी प्रकार, धारा 515 के तहत अधिकृत आयकर सलाहकारों के लिए फॉर्म संख्या 171 को भी अद्यतन किया गया है. इसमें व्यक्तिगत पहचान विवरण, व्यावसायिक योग्यताएं, प्रैक्टिस प्रमाणन और वैधानिक अयोग्यताओं से संबंधित खुलासे शामिल किए गए हैं.
Income Tax Rules Amended: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर (चौथा संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित करते हुए पंजीकृत मूल्यांककों (Valuers) और अधिकृत आयकर सलाहकारों (Tax Practitioners) के लिए पंजीकरण आवेदन की अंतिम तिथि को 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया है. इस फैसले से पेशेवरों को नए वैधानिक ढांचे के तहत अपनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मिल गया है. 17 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 120/2026 के माध्यम से इन संशोधनों को लागू किया गया है.
पंजीकरण की समय-सीमा में विस्तार, टैक्स ऑडिट की तिथि यथावत
नियम 246 और नियम 256 के तहत किए गए संशोधनों के अनुसार, मूल्यांककों और आयकर सलाहकारों के पंजीकरण से जुड़ी कट-ऑफ तिथि अब 31 मार्च 2027 होगी. इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य नए ढांचे में बदलाव के दौरान व्यावसायिक प्रतिनिधित्व और परिसंपत्ति मूल्यांकन सेवाओं को बिना किसी बाधा के जारी रखना है. यह भी पढ़े: Revised ITR Filing Guide: आईटीआर भरने में हुई गलती? जानिए 31 जुलाई की समय-सीमा के बाद रिवाइज्ड रिटर्न कैसे दाखिल करें
सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि यह समय-विस्तार केवल मूल्यांककों और कर सलाहकारों के पंजीकरण पर लागू होता है. धारा 44AB के तहत मानक टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (Tax Audit Report) दाखिल करने की अंतिम तिथि में कोई बदलाव नहीं किया गया है. संबंधित करदाताओं को अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से 30 सितंबर 2026 तक ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करानी होगी.
फॉर्म 169 और फॉर्म 171 में संशोधन
नए नियमों के तहत मूल्यांककों के लिए निर्धारित फॉर्म संख्या 169 को संशोधित किया गया है. अब अचल संपत्ति, कृषि भूमि, प्रतिभूतियों, प्लांट एवं मशीनरी, आभूषण और कलाकृतियों जैसी विभिन्न परिसंपत्ति श्रेणियों (Asset Classes) के लिए अलग-अलग आवेदन करना होगा. आवेदकों को अपनी शैक्षणिक योग्यता, पिछले तीन वर्षों का मूल्यांकन इतिहास और हित के टकराव (Conflict of Interest) न होने की घोषणा देनी होगी. इस फॉर्म का शुल्क ₹10,000 तय किया गया है, हालांकि धन-कर अधिनियम, 1957 (Wealth-tax Act) के तहत पहले से पंजीकृत मूल्यांककों को शुल्क से छूट दी गई है.
इसी प्रकार, धारा 515 के तहत अधिकृत आयकर सलाहकारों के लिए फॉर्म संख्या 171 को भी अद्यतन किया गया है. इसमें व्यक्तिगत पहचान विवरण, व्यावसायिक योग्यताएं, प्रैक्टिस प्रमाणन और वैधानिक अयोग्यताओं से संबंधित खुलासे शामिल किए गए हैं.
कर वसूली नियम 225 से सिविल गिरफ्तारी के प्रावधान खत्म
संशोधन का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू नियम 225 में किया गया बदलाव है. सीबीडीटी ने कर बकाएदारों की प्रशासनिक वसूली प्रक्रिया के तहत सिविल गिरफ्तारी और हिरासत (Arrest and Detention) से संबंधित प्रावधानों को हटा दिया है. नियम 225(4) के खंड (c) तथा उप-नियम (75) से (83) और (91) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है.
हालाँकि, कर वसूली अधिकारी अभी भी अन्य उपलब्ध माध्यमों जैसे बकाएदार की चल-अचल संपत्ति की कुर्की और बिक्री तथा रिसीवर की नियुक्ति के जरिए बकाए की वसूली कर सकेंगे.
डिजिटल हस्ताक्षर की जगह इलेक्ट्रॉनिक संचार को मान्यता
नियम 176(3)(a)(ii) में संशोधन करते हुए "डिजिटल हस्ताक्षर संलग्न करके" (by affixing digital signature) वाक्यांश को बदलकर "इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से" (by way of an electronic communication) कर दिया गया है. यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से भूतलक्षी (Retrospective) प्रभाव से लागू माना जाएगा. इससे आयकर विभाग को डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (DSC) के अलावा अन्य प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से नोटिस व दस्तावेज भेजने की कानूनी छूट मिलेगी.