Income Tax Refund: आयकर रिफंड में 29% की बढ़ोतरी, ₹2.20 लाख करोड़ तक पहुंचा; जानें आपका रिफंड क्यों अटका है और क्या करें
आयकर विभाग ने 17 सितंबर 2026 तक 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड जारी किया है, जो पिछले साल की तुलना में 29.19% अधिक है. यदि आपका रिफंड अभी तक बैंक खाते में नहीं आया है, तो जानें देरी की मुख्य वजहें और पोर्टल पर स्टेटस चेक करने का तरीका.
Income Tax Refund: केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, आयकर विभाग ने 17 सितंबर 2026 तक 2,20,026.72 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष कर रिफंड जारी किया है. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि में जारी किए गए 1,70,310.28 करोड़ रुपये के मुकाबले 29.19 प्रतिशत अधिक है. रिफंड प्रक्रिया में आई इस तेजी का मुख्य कारण टैक्स कंप्लायंस में रिकॉर्ड वृद्धि और स्वचालित प्रणालियों का उपयोग है. अगस्त के अंत तक देश में 7.8 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किए जा चुके थे. वहीं, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह भी 15.19% बढ़कर 14.32 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है.
कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत करदाताओं को मिला रिफंड का बड़ा हिस्सा
जारी किए गए कुल रिफंड में सबसे बड़ा हिस्सा कॉर्पोरेट करदाताओं का रहा है. कॉर्पोरेट सेक्टर को करीब 1,38,570 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि वेतनभोगी पेशेवरों, व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) सहित गैर-कॉर्पोरेट श्रेणी के करदाताओं को 81,439.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) की स्वचालित प्रणाली के चलते रिटर्न की प्रोसेसिंग तेज हुई है. हालांकि, इस तेजी के बावजूद कई करदाता अब भी अपने रिफंड का इंतजार कर रहे हैं. यह भी पढ़े: Income Tax Bill 2025: आयकर बिल 2025 का नया ड्राफ्ट आज लोकसभा में होगा पेश, पुराने कानून की होगी विदाई; जानें क्या होगा नया?
रिफंड अटकने के मुख्य कारण
रिफंड मिलने में देरी केवल प्रशासनिक बैकलॉग के कारण नहीं होती, बल्कि कई प्रक्रियात्मक कमियों के कारण भी सिस्टम ऑटोमैटिक रूप से रिफंड को रोक देता है:
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ई-वेरिफिकेशन न होना: आईटीआर दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन (e-verification) न करने पर रिटर्न प्रोसेस नहीं होता.
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टैक्स क्रेडिट में असमानता: फॉर्म 26AS, एआईएस (AIS) और टीडीएस (TDS)/टीसीएस (TCS) के आंकड़ों में अंतर होने पर सिस्टम क्लीयरेंस को रोक देता है.
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बैंक खाता प्री-वैलिडेट न होना: यदि ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक खाता प्री-वैलिडेट नहीं है या बैंक खाते में दर्ज नाम और पैन (PAN) विवरण का मिलान नहीं होता, तो रिफंड बैंक में ट्रांसफर नहीं हो पाता.
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बकाया टैक्स डिमांड (Section 245): यदि पिछले किसी आकलन वर्ष का टैक्स बकाया है, तो विभाग वर्तमान रिफंड राशि का समायोजन (adjustment) उस बकाए के खिलाफ कर सकता है.
अटका हुआ रिफंड कैसे करें चेक?
यदि आपका रिफंड बैंक खाते में जमा नहीं हुआ है, तो आप आयकर पोर्टल के जरिए स्थिति की जांच कर सकते हैं:
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पोर्टल पर लॉगिन करें: आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल (incometax.gov.in) पर जाकर अपने पैन और पासवर्ड के माध्यम से लॉगिन करें.
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रिटर्न स्टेटस देखें: 'e-File' मेनू में जाएं, फिर 'Income Tax Returns' और उसके बाद 'View Filed Returns' विकल्प चुनें.
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स्थिति जांचें: यहां चेक करें कि स्टेटस "Processed with Refund Due" दिख रहा है या रिटर्न अभी भी "Under Processing" है.
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बैंक खाता सत्यापन: अपने प्रोफाइल सेक्शन में जाकर 'My Bank Account' विकल्प में देखें कि आपका खाता 'Validated' है या नहीं.
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रिफंड री-इश्यू रिक्वेस्ट सबमिट करें: यदि बैंक विवरण गलत होने या आईएफएससी कोड (IFSC Code) बदलने के कारण रिफंड फेल हो गया है, तो सही खाता विवरण अपडेट कर 'Services' टैब के तहत 'Refund Re-issue' की रिक्वेस्ट दर्ज करें.
यदि पोर्टल पर किसी प्रकार का डिफेक्टिव नोटिस या पिछला टैक्स बकाया का अलर्ट दिख रहा हो, तो उसका उत्तर देकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं.