EPFO 2026 Update: केंद्र सरकार ने वेतनभोगी कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड के प्रबंधन से जुड़े सात दशक पुराने नियमों में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने लगभग 74 साल पुराने 1952 के ढांचे को बदलते हुए नई 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना 2026' (Employees' Provident Funds Scheme, 2026) को अधिसूचित कर दिया है. 29 जून 2026 से प्रभावी हुए इन नए नियमों के तहत भविष्य निधि (PF) से समय से पहले पैसा निकालने (विड्रॉल), ई-नॉमिनेशन, क्लेम सेटलमेंट की समयसीमा और नियोक्ताओं (Employers) के लिए पेनाल्टी से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव किए गए हैं. अधिकारियों के अनुसार, इस नए ढांचे का मुख्य उद्देश्य क्लेम प्रोसेसिंग की रफ्तार को बढ़ाना और पीएफ के पैसों तक कर्मचारियों की पहुंच को आसान बनाना है.
पीएफ से पैसा निकालना हुआ आसान
नए नियमों के तहत समय से पहले पीएफ फंड से पैसा निकालने की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया गया है. पुराने जटिल नियमों की जगह अब एक नई व्यवस्था 'एलिजिबल मेंबर बैलेंस' (Eligible Member Balance) लागू की गई है. इस नियम के तहत कर्मचारी को अपने कुल फंड (कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान प्लस ब्याज) का न्यूनतम 25 प्रतिशत हिस्सा खाते में अनिवार्य रूप से बनाए रखना होगा. इस अनिवार्य राशि को छोड़कर बाकी बचे 75 प्रतिशत हिस्से को 'एलिजिबल मेंबर बैलेंस' माना जाएगा, जिसे विशेष परिस्थितियों में निकाला जा सकता है. यह भी पढ़े: EPFO New Rules: ईपीएफओ के नए नियम लागू, अब सिर्फ 3 दिन में सेटल होंगे PF क्लेम; निकासी प्रक्रिया हुई और आसान
खाताधारक ईपीएफओ की सदस्यता के 12 महीने पूरे करने के बाद विशिष्ट उद्देश्यों के लिए इस राशि का 100 प्रतिशत तक निकाल सकते हैं. खुद के या परिवार के इलाज के लिए कितनी भी बार पैसा निकाला जा सकता है. वहीं, पूरे करियर के दौरान शिक्षा के लिए अधिकतम 10 बार और शादी या घर से जुड़े कामों (खरीदने, बनाने या मरम्मत) के लिए 5-5 बार आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की अनुमति होगी. जिन कर्मचारियों की नौकरी को अभी एक साल पूरा नहीं हुआ है, वे भी सेवा छोड़ने पर अपना एलिजिबल बैलेंस निकाल सकेंगे.
क्लेम सेटलमेंट में देरी पर कमिश्नर की सैलरी से कटेगा जुर्माना
ईपीएफओ ने खाताधारकों के प्रति जवाबदेही तय करते हुए क्लेम सेटलमेंट के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है. नए नियमों के अनुसार, पूरी तरह से भरे हुए आवेदन प्राप्त होने के बाद पीएफ दावों का निपटारा अधिकतम 20 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा.
यदि ईपीएफओ बिना किसी उचित कारण के इस 20 दिन की समयसीमा के भीतर क्लेम सेटलमेंट करने में विफल रहता है, तो उसे 12 प्रतिशत वार्षिक दर से दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) देना होगा. सबसे खास बात यह है कि इस ब्याज का भुगतान पीएफ फंड से नहीं, बल्कि देरी के लिए जिम्मेदार संबंधित कमिश्नर के वेतन से वसूल कर किया जाएगा. इसके अलावा, यदि आवेदन में कोई कमी है, तो उसकी जानकारी भी इसी 20 दिन के भीतर कर्मचारी को देना जरूरी होगा.
नॉमिनेशन के नियम बदले, शादी के बाद पुराना नॉमिनी होगा अमान्य
नए नियमों के तहत नॉमिनेशन (नामांकन) प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. 1952 की पुरानी योजना के तहत किए गए सभी पुराने नामांकन यदि नए नियमों के विपरीत हैं, तो वे अमान्य हो जाएंगे. ऐसे में सभी सदस्यों को नए सिरे से ई-नॉमिनेशन (e-Nomination) दर्ज करना होगा.
नया नियम स्पष्ट करता है कि किसी सदस्य द्वारा शादी से पहले किया गया कोई भी नामांकन शादी के बाद स्वतः ही रद्द (Void) हो जाएगा. विवाहित सदस्यों के लिए शादी के बाद नया नॉमिनेशन करना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही, यदि किसी सदस्य का परिवार है, तो वह केवल अपने परिवार के सदस्यों के पक्ष में ही नामांकन कर सकता है.
नियोक्ताओं के लिए राहत और देरी पर ग्रेडेड पेनाल्टी की व्यवस्था
नियोक्ताओं (Employers) के लिए सरकार ने 'कर्मचारी नामांकन अभियान 2026' (Employees' Enrolment Campaign, 2026) की शुरुआत की है, जो 31 अक्टूबर 2026 तक वैध रहेगी. इसके तहत कंपनियां 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच छूटे हुए कर्मचारियों का पंजीकरण करा सकती हैं. इस अभियान के तहत कंपनियों को केवल अपना पिछला योगदान जमा करना होगा, और यदि कर्मचारियों का हिस्सा पहले नहीं काटा गया था, तो उसे माफ कर दिया जाएगा. इस दौरान पेनाल्टी की जगह प्रति घोषणा मात्र 100 रुपये और लागू ब्याज देना होगा.
इसके अलावा, कंपनियों द्वारा पीएफ योगदान जमा करने में होने वाली देरी पर लगने वाले जुर्माने के ढांचे को भी बदल दिया गया है. साल 2024 में लागू फ्लैट 1 फीसदी मासिक जुर्माने की जगह अब ग्रेडेड पेनाल्टी सिस्टम लागू किया गया है. इसके तहत दो महीने से कम की देरी पर 0.25 फीसदी प्रति माह, दो से चार महीने की देरी पर 0.5 फीसदी प्रति माह और चार महीने से अधिक की देरी होने पर 1 फीसदी प्रति माह की दर से जुर्माना वसूला जाएगा.













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