8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में वेतन बढ़ोतरी के साथ पुरानी पेंशन और भत्तों पर भी बड़ी मांगें, यहां पढ़ें पूरी जानकारी
8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की 9 प्रमुख मांगों का विस्तृत ब्योरा। पुरानी पेंशन, कैशलेस इलाज, न्यूनतम वेतन फॉर्मूला और भत्तों में संशोधन की स्थिति।
8th Pay Commission: केंद्र सरकार के 45 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है. आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न बैठकों में कर्मचारी संगठनों ने वेतन वृद्धि के अलावा पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं और भत्तों में व्यापक सुधार के प्रस्ताव रखे हैं। इन मांगों को नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन कर रहे हैं.
सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद से आयोग लगातार कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है. हालांकि, इन मांगों पर अंतिम निर्णय कार्मिक विभाग (DoPT) और वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की समीक्षा के बाद कैबिनेट द्वारा लिया जाएगा. यह भी पढ़े: 8th Pay Commission News: देरी से लागू हुआ 8वां वेतन आयोग तो कितना बढ़ेगा एरियर? जानें लेवल 6 से 8 तक का पूरा हिसाब
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांग 2004 के बाद सेवा में आए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना है। वर्तमान में ये कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के अंतर्गत आते हैं। कर्मचारी प्रतिनिधियों का तर्क है कि सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तय पेंशन का प्रावधान पुनः लागू किया जाना चाहिए.
स्वास्थ्य, शिक्षा और पेंशन लाभों में सुधार
स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में पेंशनभोगियों और सेवारत कर्मचारियों के लिए पूरी तरह से कैशलेस इलाज की मांग की गई है ताकि आपात स्थिति में जेब से भुगतान न करना पड़े। शिक्षा के क्षेत्र में, बच्चों के शिक्षा भत्ते और हॉस्टल सब्सिडी का दायरा बढ़ाकर स्नातकोत्तर (Post Graduation) स्तर तक करने का सुझाव दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और फैमिली पेंशन के नियमों में संशोधन की मांग की गई है। कम्यूटेड पेंशन की राशि को 15 साल के बजाय 12 साल में पुनः बहाल करने के प्रावधान को सुचारू रूप से लागू करने पर बल दिया गया है.
न्यूनतम वेतन का नया फॉर्मूला और करियर प्रगति
न्यूनतम वेतन की गणना के लिए प्रयुक्त उपभोग मानक (Consumptions Units) को 3 से बढ़ाकर 3.6 यूनिट करने का प्रस्ताव रखा गया है, जो श्रम मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर आधारित है। इससे शुरुआती वेतन स्तर में सकारात्मक बदलाव संभव है.
समय पर पदोन्नति न मिलने की स्थिति में मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम (MACPS) में सुधार की मांग की गई है ताकि कर्मचारियों का वित्तीय नुकसान न हो.
विशेष भत्ते और आयोग का दायरा विस्तार
रेलवे कर्मियों के लिए जोखिम एवं कठिनाई भत्ता (Risk and Hardship Allowance) लागू करने की बात कही गई है। वहीं, रक्षा क्षेत्र में बारूद, रसायन व विस्फोटक सामग्री संभालने वाले सिविलियन कर्मचारियों के लिए विशेष जोखिम भत्ता और बीमा कवर का आग्रह किया गया है.
संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के दायरे को व्यापक बनाते हुए इसमें ग्रामीण डाक सेवक (GDS), अर्धसैनिक बल (Paramilitary Forces) और केंद्रीय स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों को भी शामिल करने का सुझाव दिया है, जिन्हें 7वें वेतन आयोग में शामिल नहीं किया गया था.