8th Pay Commission HRA Calculator: 8वें वेतन आयोग के बाद केंद्रीय कर्मचारियों के HRA में हो सकती है बढ़ोतरी, जानें लेवल 1-10 तक का पूरा गणित
8वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Pay) के साथ-साथ मकान किराया भत्ता (HRA) में भी बड़ा बदलाव होने की उम्मीद है. जानिए फिटमेंट फैक्टर और विभिन्न शहरों (X, Y, Z) के आधार पर पे-लेवल 1 से 10 तक के कर्मचारियों के एचआरए का पूरा गणित और अनुमानित आंकड़े.
8th Pay Commission HRA Calculator: केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसकी सिफारिशों को लागू करने पर विचार किए जाने के बीच, केंद्रीय कर्मचारियों को अपने वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की उम्मीद है. इस बदलाव में कर्मचारियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance - HRA) बना हुआ है. बेसिक सैलरी (मूल वेतन) में संभावित बढ़ोतरी के कारण कर्मचारियों के एचआरए में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकती है. चूंकि एचआरए सीधे तौर पर मूल वेतन से जुड़ा होता है, इसलिए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक सैलरी बढ़ते ही एचआरए का ग्राफ भी ऊपर चला जाएगा.
वर्तमान एचआरए ढांचा और शहरों का वर्गीकरण
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, केंद्रीय कर्मचारियों को उनके पोस्टिंग वाले शहरों की श्रेणी के आधार पर तय प्रतिशत में एचआरए दिया जाता है. शहरों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. 'X' श्रेणी के शहरों (जैसे मुंबई, दिल्ली) में रहने वाले कर्मचारियों को 30 प्रतिशत, 'Y' श्रेणी के शहरों में 20 प्रतिशत और 'Z' श्रेणी के छोटे शहरों या कस्बों में 10 प्रतिशत एचआरए मिल रहा है.
यह दरें तब प्रभावी हुईं जब महंगाई भत्ता (DA) 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गया था. अब नए वेतन आयोग में यदि सरकार एचआरए के इस प्रतिशत को नहीं भी बदलती है, तो भी फिटमेंट फैक्टर के कारण बेसिक सैलरी बढ़ने से कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में एचआरए का हिस्सा स्वतः बढ़ जाएगा.
कर्मचारी संगठनों की मांग: स्लैब में हो सुधार
विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और संगठनों का मानना है कि महानगरों और बड़े शहरों में रहने का खर्च और मकानों का किराया तेजी से बढ़ा है. ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINSPEF) और नेशनल काउंसिल - जेसीएम (NC-JCM) जैसे संगठनों ने वेतन आयोग के समक्ष मांग रखी है कि एचआरए के मौजूदा स्लैब नाकाफी हैं.
कर्मचारी संगठनों की ओर से एचआरए को बढ़ाकर 36 प्रतिशत, 24 प्रतिशत और 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया गया है. वहीं कुछ अन्य आक्रामक प्रस्तावों में इसे शहरों की श्रेणी के अनुसार 40 प्रतिशत, 35 प्रतिशत और 30 प्रतिशत तक करने की वकालत की गई है. सरकार अंतिम रूप से किस फिटमेंट फैक्टर और एचआरए स्लैब को मंजूरी देती है, इसी पर कर्मचारियों की असल बढ़ोतरी निर्भर करेगी.
पे-लेवल 1 से 5 के लिए संभावित एचआरए का अनुमान (रुपये में)
नीचे दी गई तालिका में मौजूदा एचआरए प्रतिशत (30%, 20%, 10%) को आधार मानकर 2.0 से लेकर 2.57 तक के संभावित फिटमेंट फैक्टर के अनुसार एक अनुमानित गणना पेश की गई है:
| पे लेवल | वर्तमान बेसिक पे | X श्रेणी के शहर (न्यूनतम - अधिकतम) | Y श्रेणी के शहर (न्यूनतम - अधिकतम) | Z श्रेणी के शहर (न्यूनतम - अधिकतम) |
| लेवल 1 | ₹18,000 | ₹10,800 – ₹13,880 | ₹7,200 – ₹9,250 | ₹3,600 – ₹4,630 |
| लेवल 2 | ₹19,900 | ₹11,940 – ₹15,340 | ₹7,960 – ₹10,230 | ₹3,980 – ₹5,110 |
| लेवल 3 | ₹21,700 | ₹13,020 – ₹16,730 | ₹8,680 – ₹11,150 | ₹4,340 – ₹5,580 |
| लेवल 4 | ₹25,500 | ₹15,300 – ₹19,660 | ₹10,200 – ₹13,110 | ₹5,100 – ₹6,550 |
| लेवल 5 | ₹29,200 | ₹17,520 – ₹22,510 | ₹ |