इंडसइंड बैंक में 172.58 करोड़ रुपये की आंतरिक धोखाधड़ी का संदेह, माइक्रोफाइनेंस कारोबार में गड़बड़ी का आरोप
IndusInd Bank Flags Fraud Of Rs 172.58 CR

इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) ने बुधवार को जानकारी दी है, कि उसके माइक्रोफाइनेंस बिजनेस (Microfinance Business) में आंतरिक धोखाधड़ी (Internal Fraud) का एक मामला सामने आया है. इस धोखाधड़ी में 172.58 करोड़ रुपये को गलत तरीके से 'फीस इनकम' (Fee Income) के रूप में तीन तिमाहियों (April–December 2024) में दर्ज किया गया था. यह गड़बड़ी बैंक की आंतरिक ऑडिट टीम (IAD) और बाहरी पेशेवर फर्म द्वारा की गई जांच के बाद सामने आया है.

क्या हुआ है मामला?

बैंक ने बताया कि 20 मई 2025 को उसकी आंतरिक ऑडिट टीम ने रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया है, कि कुल 172.58 करोड़ रुपये तीन तिमाहियों में गलत तरीके से ‘फीस इनकम’ के रूप में दर्ज किए गए थे. इस राशि को अब 2024-25 की चौथी तिमाही (Q4) में वापस कर दिया गया है, यानी सही तरीके से अकाउंट में सुधार किया गया है.

18 साल में पहली बार हुआ घाटा

इस धोखाधड़ी और लेखा गड़बड़ी (Accounting Lapses) के कारण बैंक को 18 सालों में पहली बार तिमाही घाटा हुआ है. बैंक को संदेह है, कि कुछ कर्मचारियों ने जानबूझकर धोखाधड़ी की, जिससे यह स्थिति बनी है.

डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में भी गड़बड़ी

इससे पहले मार्च 2025 में बैंक ने अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो (Derivatives Portfolio) में भी गड़बड़ी की बात मानी थी, जिसका असर बैंक की नेटवर्थ (दिसंबर 2024 तक) पर लगभग 2.35% पड़ा था. इस मामले की गहराई से जांच के लिए बैंक ने बाहरी एजेंसी पीडब्ल्यूसी (PricewaterhouseCoopers) को नियुक्त किया है. पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून 2024 तक इस गड़बड़ी का बैंक की बैलेंस शीट पर कुल 1,979 करोड़ रुपये का नकारात्मक असर पड़ा है.

सीईओ और डिप्टी सीईओ ने दिया इस्तीफा

इन सब घटनाओं के बाद 29 अप्रैल 2025 को बैंक के सीईओ (CEO) सुमंत कथपालिया और डिप्टी सीईओ (Deputy CEO) अरुण खुराना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद बैंक के बोर्ड ने एक कमेटी ऑफ एग्जीक्यूटिव्स (Committee Of Executives) गठित की है, जो तब तक बैंक की जिम्मेदारी संभालेगी जब तक नया एमडी (MD) और सीईओ नियुक्त नहीं हो जाता है या तीन महीने की अवधि पूरी नहीं हो जाती है.

और भी खुलासे

बैंक की आंतरिक ऑडिट टीम ने जांच में पाया कि बैलेंस शीट में 'अन्य संपत्तियों' (Other Assets) के रूप में 595 करोड़ रुपये की ऐसी राशि दर्ज है, जिसका कोई स्पष्ट हिसाब-किताब या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. यह रकम कैसे और क्यों जोड़ी गई, इसका ठोस आधार अभी तक नहीं मिल पाया है. इसके अलावा, माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो की जांच में यह भी सामने आया कि 674 करोड़ रुपये की राशि को ब्याज आय (Interest Income) के रूप में गलत तरीके से दिखाया गया था. ये दोनों गड़बड़ियाँ बैंक के आंतरिक रिकॉर्ड में गंभीर खामियों की ओर इशारा करती हैं. बैंक ने इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए जांच और सुधार की प्रक्रिया तेज कर दी है.