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Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन संकट पर भारत का रुख साफ है- विदेश मंत्री एस. जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख स्पष्ट है. उन्होंने साथ ही कहा कि नई दिल्ली दोनों देशों से 'शत्रुता की समाप्ति, वार्ता और राष्ट्रीय संप्रभुता कायम करने का आग्रह करती है.

Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन संकट पर भारत का रुख साफ है- विदेश मंत्री एस. जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर (Photo Credits: PTI)

नई दिल्ली, 26 अप्रैल : विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने मंगलवार को कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख स्पष्ट है. उन्होंने साथ ही कहा कि नई दिल्ली दोनों देशों से 'शत्रुता की समाप्ति, वार्ता और राष्ट्रीय संप्रभुता कायम करने का आग्रह करती है.' रायसीना डायलॉग में एक बातचीत के दौरान, जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन में संघर्ष वर्तमान में सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक है. उन्होंने कहा कि यह न केवल हितों या मूल्यों के कारण, बल्कि दुनिया भर में परिणामों के कारण भी है. युद्ध पर भारत के रुख के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "जब एशिया में नियम-आधारित व्यवस्था (रूल बेस्ड ऑर्डर) चुनौती के अधीन थी, तो हमें यूरोप से सलाह मिली थी कि अधिक व्यापार करें. कम से कम हम आपको वह सलाह नहीं दे रहे हैं." उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में जो हुआ वह स्पष्ट रूप से बताता है कि नियम-आधारित आदेश क्या था. "हमें कूटनीति पर लौटने का रास्ता खोजना होगा और ऐसा करने के लिए, लड़ाई को रोकना होगा." युद्ध के व्यापक परिणामों के बारे में बात करते हुए, मंत्री ने कहा, "इस संघर्ष में कोई विजेता नहीं होगा और तेल और खाद्य कीमतों पर इसका प्रभाव पड़ा है."

यह पूछे जाने पर कि 'तीन चीजें जो उन्हें रात में जगाए रखती हैं', जयशंकर ने जवाब दिया, "अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को जो झटके लग रहे हैं, विशेष रूप से पिछले दो वर्षों में उनमें कोविड-19 महामारी, अफगानिस्तान और यूक्रेन, पश्चिम और रूस व अमेरिका और चीन के बीच तनाव है." उन्होंने यह भी समझाया कि यूक्रेन चीन के लिए मिसाल नहीं है, पिछले एक दशक से एशिया में इस तरह के आयोजन यूरोप के ध्यान के बिना चल रहे हैं. "तो, यह यूरोप के लिए एशिया को देखना शुरू करने के लिए एक वेकअप कॉल है. यह अस्थिर सीमाओं, आतंकवाद और नियम-आधारित व्यवस्था के लिए निरंतर चुनौतियों के साथ दुनिया का एक हिस्सा है. बाकी दुनिया को इसे पहचानना होगा. समस्याएं 'होने वाली' नहीं हैं, बल्कि यह हो रही हैं." यह भी पढ़ें :समय यात्रा संभव हो सकती है, लेकिन केवल समानांतर समयरेखा के साथ

पश्चिमी इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका पर, मंत्री ने कहा, "हमें अपने इतिहास को पुन: प्राप्त करने की आवश्यकता है. हमारे संबंध और व्यापार औपनिवेशिक काल में बाधित थे, लेकिन अधिक वैश्वीकृत दुनिया में, हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि हम कैसे पुनर्निर्माण और बातचीत करना चाहते हैं. यह बिना मध्यस्थों के एक-दूसरे के साथ होना चाहिए." उन्होंने यह भी कहा कि इसका उद्देश्य हिंद महासागर समुदाय को फिर से बनाना, दूर देशों की ओर देखने के बजाय एक-दूसरे के बीच समाधान तलाशना और एक-दूसरे के साथ साझेदारी करना होना चाहिए.

जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत के कदमों के बारे में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली के नजरिए से इस मुद्दे के दो हिस्से हैं- एक है जलवायु कार्रवाई और दूसरा है जलवायु न्याय. उन्होंने कहा, "हमें दोनों की आवश्यकता है.. जब जलवायु कार्रवाई की बात आती है, तो हर किसी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने की आवश्यकता होती है. लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि अधिक कमजोर, कम संसाधन वाले देशों और समाजों का समर्थन किया जाए." मंत्री ने कहा, "आज, हमें कनेक्टिविटी, जलवायु परिवर्तन पर एक साथ काम करने के तरीके खोजने की जरूरत है और भारत इन वैश्विक मुद्दों पर और अधिक ठोस तरीके से आगे बढ़ने के लिए तैयार है."

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 26, 2022 02:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).