Odisha Bandh on October 8: ओडिशा में 8 अक्टूबर को 'इंडिया' गठबंधन ने किया राज्यव्यापी बंद का आह्वान
ओडिशा में विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' ने केंद्र सरकार के नए खनन कानून को वापस लेने और राज्य सरकार से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों को लेकर मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को 8 अक्टूबर को राज्यव्यापी 'ओडिशा बंद' का आह्वान किया है.
भुवनेश्वर: ओडिशा की राजनीति में मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के अगले ही दिन विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और केंद्र की खनन नीतियों के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया है. विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन ने मंगलवार को राजधानी भुवनेश्वर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए 8 अक्टूबर को संपूर्ण ओडिशा बंद का आधिकारिक ऐलान किया है.
पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस, सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल) लिबरेशन, फॉरवर्ड ब्लॉक, एनसीपी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सैकड़ों कार्यकर्ता और शीर्ष नेता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने पहले विधानसभा का घेराव करने की योजना बनाई थी, लेकिन सत्र स्थगित होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के आधिकारिक आवास का रुख किया, जहां पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प भी देखने को मिली.
नए खनन कानून (MMDR Act) को रद्द करने की मांग
विपक्षी दलों के अनुसार, 8 अक्टूबर के बंद का प्राथमिक कारण केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खनन कानून में संशोधन हैं:
- संसाधनों की स्वायत्तता पर खतरा: ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास और वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया कि नया कानून ओडिशा के खनिज संसाधनों पर राज्य के विशेषाधिकार और वित्तीय स्वायत्तता को सीमित करता है.
- कॉरपोरेट लूट का आरोप: सीपीआई(एम) ओडिशा राज्य सचिव सुरेश चंद्र पाणिग्रही ने कहा, "हमारी मुख्य मांग MMDR संशोधन अधिनियम 2026 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करना, ओडिशा के खनिज अधिकारों व वित्तीय स्वायत्तता की रक्षा करना और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों को बड़े कॉरपोरेट्स के हाथों लुटने से बचाना है."
- विपक्षी नेताओं का तर्क है कि केंद्रीय संशोधन संघवाद के मूल सिद्धांतों को चोट पहुंचाते हैं, जिससे मुख्य खनिज ब्लॉकों की नीलामी और नियमन में राज्य सरकार का अधिकार सीमित हो जाएगा और रॉयल्टी राजस्व को नुकसान पहुंचेगा.
स्कूली किताबों का विवाद और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
खनन कानून के अलावा, गठबंधन ने राज्य स्तरीय प्रशासनिक और नीतिगत खामियों को भी बंद के एजेंडे में शामिल किया है:
- किताबों में गंभीर गलतियां: विपक्षी दलों ने राज्य की सरकारी स्कूली पाठ्यपुस्तकों में छपी गंभीर त्रुटियों को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए.
- मंत्री का इस्तीफा: इस लापरवाही की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए विपक्ष ने राज्य के स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के तत्काल इस्तीफे की मांग की है.
- गठबंधन नेताओं ने घोषणा की कि 8 अक्टूबर को आवश्यक सेवाओं को छोड़कर राज्य भर में व्यावसायिक प्रतिष्ठान, बाजार और परिवहन सेवाएं बंद रखी जाएंगी.
सत्ताधारी भाजपा का पलटवार: 'आदतन विरोध कर रही है कांग्रेस'
ThePrint की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्षी बंद को पूरी तरह खारिज किया है:
- प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को सरकार के हर सकारात्मक कदम का विरोध करने की आदत हो गई है. उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने पहले जीएसटी का विरोध किया और अब खनन सुधारों का विरोध कर रही है. कांग्रेस जनता के बीच अपनी पहचान पूरी तरह खो चुकी है."
- भाजपा महासचिव बिरांची नारायण त्रिपाठी ने कहा कि केंद्र के खनन सुधारों से खनिज पट्टों के आवंटन में पारदर्शिता आई है, विवेकाधीन कोटा खत्म हुआ है और राज्यों को मिलने वाली नियमित रॉयल्टी में भारी इजाफा हुआ है.
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि 8 अक्टूबर को प्रस्तावित बंद के मद्देनजर राजधानी भुवनेश्वर और संवेदनशील जिलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आवश्यक नागरिक सेवाओं को सुचारू रखने के लिए सुरक्षात्मक प्रबंध किए जा रहे हैं.