स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तमिलनाडु के CM विजय का बड़ा ऐलान, नवजात शिशुओं के लिए सोने की अंगूठी योजना की घोषणा, स्कीम की 15 सितंबर से होगी शुरुआत

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के नागरिकों के लिए एक बड़ी कल्याणकारी योजना की घोषणा की है.

CM Vijay

Independence Day 2026: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के नागरिकों के लिए एक बड़ी कल्याणकारी योजना की घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी देने की योजना 15 सितंबर 2026 से औपचारिक रूप से शुरू की जाएगी.

इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए राज्य सरकार ने 755.83 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट निर्धारित किया है.   यह भी पढ़े: Ladki Bahin Yojana: लाडकी बहन योजना को लेकर बड़ा अपडेट, 15 अगस्त से पहले आ सकती है जुलाई की किस्त; ऐसे चेक करें बैलेंस

 शिशुओं के लिए सोने की अंगूठी योजना की घोषणा

15 सितंबर को होगी औपचारिक शुरुआत

'थाईमामन तंग मोथिरम थिटम' (मामा की सोने की अंगूठी योजना) नाम से जानी जाने वाली यह पहल 15 सितंबर को आधिकारिक तौर पर लागू होगी. यह तारीख तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ नेता सी.एन. अन्नादुरई की जयंती की प्रतीक है.

 CM विजय का बड़ा ऐलान

योजना के पारदर्शी कार्यान्वयन, निगरानी और प्रबंधन के लिए एक समर्पित राज्य परियोजना/कार्यक्रम प्रबंधन इकाई की स्थापना की जा रही है.

नवजात बच्चों को मिलेगी 1 ग्राम सोने की अंगूठी

इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक पात्र नवजात शिशु को 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी. तमिलनाडु की परंपरा में मामा द्वारा नवजात शिशु को उपहार और आशीर्वाद देने की प्रथा ('थाईमामन सीर') रही है. सरकार इस योजना के जरिए प्रतीकात्मक रूप से मामा की भूमिका निभाएगी.

तमिलनाडु में हर साल लगभग 7.8 लाख प्रसव दर्ज किए जाते हैं, जिनमें से करीब 53 प्रतिशत (4.2 लाख) प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में होते हैं. यह योजना सालाना लगभग 4.2 लाख नवजात शिशुओं को कवर करेगी.

पात्रता और आवश्यक दस्तावेज

यह योजना तमिलनाडु के उन स्थायी निवासियों के लिए है जो सरकारी अस्पतालों में बच्चों को जन्म देते हैं. सरकारी आदेश के अनुसार, यह लाभ बच्चे के जन्म क्रम या लिंग (लड़का या लड़की) के भेदभाव के बिना सभी पर लागू होगा.

लाभार्थियों को निवास प्रमाण पत्र जमा करना होगा. इसके लिए राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पहचान दस्तावेज, डाक विभाग पता कार्ड या अधिवास प्रमाण पत्र (Nativity Certificate) स्वीकार किए जाएंगे.

सार्वजनिक स्वास्थ्य और चुनावी वादे से जुड़ाव

राज्य सरकार के अनुसार यह कदम केवल एक कल्याणकारी उपाय नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का भी प्रयास है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, निजी अस्पतालों में प्रसव का औसत खर्च काफी अधिक होता है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह खर्च बेहद कम है. इस योजना से सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में प्रसव को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री विजय ने राज्य की जनता से नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने का वादा किया था. 15 सितंबर से लागू हो रही यह योजना उनके चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में एक प्रमुख कदम मानी जा रही है.

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