अधिक यूएस टैरिफ से भारतीय फार्मा कंपनियों को मार्केट शेयर बढ़ाने में मिलेगी मदद: रिपोर्ट
बढ़ते अमेरिकी टैरिफ से भारतीय फार्मा कंपनियों को मार्केट शेयर बढ़ाने में मदद मिल सकती है. यह जानकारी जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में दी गई. जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय दवा कंपनियों में बेहतर लागत प्रतिस्पर्धात्मकता के कारण अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की कीमत पर बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की क्षमता है.
मुंबई, 28 मार्च : बढ़ते अमेरिकी टैरिफ से भारतीय फार्मा कंपनियों को मार्केट शेयर बढ़ाने में मदद मिल सकती है. यह जानकारी जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में दी गई. जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय दवा कंपनियों में बेहतर लागत प्रतिस्पर्धात्मकता के कारण अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की कीमत पर बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की क्षमता है.
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि अधिक टैरिफ के कारण इस बात की भी संभावना कम है कि भारतीय फार्मा कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं को अमेरिका में शिफ्ट करें. जेपी मॉर्गन ने कहा कि उपभोक्ताओं के लिए दवाइयों की कीमत में वृद्धि और सीमित आपूर्ति के चलते फार्मास्यूटिकल्स पर 25 प्रतिशत या उससे अधिक टैरिफ असंभव है. यह भी पढ़ें : यूट्यूबर मनीष कश्यप ने विवादित न्यूज प्रकाशित करने के लिए अपने यूट्यूब चैनल के खिलाफ FIR के बाद बीजेपी छोड़ने और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की घोषणा की
रिपोर्ट में बताया गया कि अगर फार्मास्यूटिकल्स पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका एक बड़ा हिस्सा ग्राहकों को हस्तांतरित कर दिया जाएगा. इसकी वजह दवाइयों की नियमित मांग बने रहना है. टैरिफ में बढ़ोतरी का बाकी बचा हिस्सा मैन्युफैक्चरर्स और फार्मेसी बेनिफिट मैनेजर्स (पीबीएम) द्वारा वहन किया जाएगा.
टैरिफ वृद्धि से दवाओं की लागत बढ़ने की आशंका है और मध्यम अवधि में अमेरिका में मरीजों के लिए बीमा प्रीमियम में भी वृद्धि होगी. ब्रोकरेज ने कहा कि अगर टैरिफ जारी रहता है, तो बड़ी भारतीय फार्मा कंपनियां अपनी बातचीत की शक्ति बढ़ाने के लिए एकजुट हो सकती हैं, लेकिन उनके बाजार से बाहर निकलने की संभावना नहीं है.
जेपी मॉर्गन का यह भी मानना है कि बायोसिमिलर को टैरिफ से छूट दी जा सकती है. अमेरिका में इन उत्पादों के लिए सीमित मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर होने के कारण मांग का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि बायोसिमिलर पर टैरिफ लगाने से मरीजों के लिए लागत बढ़ सकती है.
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अलावा, इजराइल और स्विट्जरलैंड से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर आयात शुल्क लगाए जाने की संभावना बहुत अधिक है. इसकी वजह इन देशों में टेवा और सैंडोज जैसी दवाओं की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं होना है. रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनियां भारतीय कंपनियों की तुलना में कम लाभ मार्जिन पर काम करती हैं और इसलिए टैरिफ से उन पर अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 28, 2025 01:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

