Haldwani Shuddhikaran Row: खरगे ने राज्यसभा में उठाया 'शुद्धिकरण' का मुद्दा, BJP ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण और की निंदा (Videos)
हल्द्वानी की इस घटना ने जाति, धार्मिक भावनाओं, राजनीतिक अभिव्यक्ति और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल जैसे मुद्दों को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है. BJP ने कथित शुद्धिकरण की घटना से खुद को अलग करते हुए जांच की बात कही है, जबकि कांग्रेस लगातार घटना की परिस्थितियों और इसके पीछे की भूमिका पर सवाल उठा रही है.
Haldwani Shuddhikaran Row: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनके हालिया सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद रामलीला मैदान में कथित 'शुद्धिकरण' किए जाने का मुद्दा राज्यसभा में उठाया. खरगे ने कहा कि इस तरह की घटना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को लेकर सवाल खड़े करती है. इस मुद्दे पर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस भी देखने को मिली. राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कथित शुद्धिकरण की निंदा की. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती है. नड्डा ने मामले की जांच कराने की बात कही और खरगे की भावनाएं आहत होने पर खेद भी जताया. Opposition MPs Protest With Toy Monkey Against PM Modi: '56 इंच का छोटा बंदर...', पीएम मोदी के खिलाफ विपक्षी सांसदों का अनोखा प्रदर्शन, खिलौना बंदर लेकर संसद के बाहर लगाए नारे (Video)
खरगे ने राज्यसभा में उठाया हल्द्वानी का मुद्दा
मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि उन्होंने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था. उनके मुताबिक, भाषण के दौरान उन्होंने सरकार से जुड़े मुद्दों पर बात की और किसी विशेष समुदाय या धर्म का उल्लेख नहीं किया. खरगे का आरोप है कि उनके कार्यक्रम के बाद बीजेपी से जुड़े लोगों ने उस मंच को 'शुद्ध' करने के लिए वहां हवन कराया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है. खरगे ने कहा कि इस घटना से उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनके साथ 'अछूत' की तरह व्यवहार किया गया हो. उन्होंने इसे सार्वजनिक जीवन में सम्मान और समानता से जोड़ते हुए अपनी चिंता सदन के सामने रखी.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में 'शुद्धीकरण' का मुद्दा उठाया:
बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने इस रस्म की निंदा की:
जेपी नड्डा ने कथित अनुष्ठान की निंदा की
खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती है. नड्डा ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और पार्टी इस घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी लेगी. उन्होंने खरगे से कहा कि यदि उनकी भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है. BJP की ओर से दिए गए इस बयान का उद्देश्य पार्टी को कथित हवन से अलग करना और मामले की गंभीरता को स्वीकार करना था.
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में क्या हुआ था?
विवाद की शुरुआत 10 अगस्त को हुई, जब श्री राम सेना धरम मार्थ सेवा न्यास संगठन से जुड़े लोगों ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हवन किया. यह कार्यक्रम खरगे की 8 अगस्त की जनसभा के दो दिन बाद हुआ. संगठन से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर कहा कि मैदान का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है और उन्होंने वहां राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर आपत्ति जताई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खरगे की जनसभा के दौरान कुछ विवादित नारे लगाए गए थे.
उत्तराखंड BJP ने संगठन से संबंध से किया इनकार
कांग्रेस की उत्तराखंड इकाई ने हवन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसके पीछे BJP से जुड़े लोग थे. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पुलिस की कार्रवाई और प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए. वहीं उत्तराखंड के BJP कैबिनेट मंत्री और प्रदेश प्रवक्ता खजान दास ने पार्टी और हवन आयोजित करने वाले लोगों के बीच किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया. उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को 'निराधार, झूठा और भ्रामक' बताया.
खजान दास ने इसके बजाय कांग्रेस की जनसभा में कथित तौर पर लगाए गए नारों पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि इन नारों से सनातन भावनाएं आहत हुई हैं और विपक्ष इस विवाद के जरिए उस मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है.
राजनीतिक विवाद जारी
हल्द्वानी की इस घटना ने जाति, धार्मिक भावनाओं, राजनीतिक अभिव्यक्ति और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल जैसे मुद्दों को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है. BJP ने कथित शुद्धिकरण की घटना से खुद को अलग करते हुए जांच की बात कही है, जबकि कांग्रेस लगातार घटना की परिस्थितियों और इसके पीछे की भूमिका पर सवाल उठा रही है. दोनों दल इस घटना को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है.