GVK Fact Checks Rahul Gandhi: जीवीके ने राहुल गांधी के दावों की निकाली हवा, कहा- मुंबई एयरपोर्ट को बेचने का कोई दबाव नहीं था
जीवीके समूह के वाइस चेयरमैन जी.वी. संजय रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि अडानी समूह या किसी और की ओर से मुंबई हवाईअड्डे को बेचने का बिल्कुल भी दबाव नहीं था.
नई दिल्ली, 8 फरवरी : जीवीके समूह के वाइस चेयरमैन जी.वी. संजय रेड्डी (G.V. Sanjay Reddy
) ने मंगलवार को कहा कि अडानी समूह या किसी और की ओर से मुंबई हवाईअड्डे को बेचने का बिल्कुल भी दबाव नहीं था. उनका यह बयान संसद में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की इस टिप्पणी के बाद आया है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने जीवीके पर दबाव डाला था और इस समूह से मुंबई हवाईअड्डे को अपहृत कर इसे अडानी समूह को सौंप दिया था. रेड्डी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी सरकारी एजेंसियों के किसी भी दबाव से भी इनकार किया.
जुलाई 2021 में अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने जीवीके से मुंबई हवाईअड्डे का अधिग्रहण किया था. रेड्डी ने एक समाचार चैनल से कहा, "मैं इस लेन-देन की पृष्ठभूमि की व्याख्या करता हूं. आप जानते हैं, शायद उस (बिक्री) से एक साल पहले, हम धन उगाहने पर विचार कर रहे थे, क्योंकि अपनी हवाईअड्डे की होल्डिंग कंपनी पर हमने लगभग 10 साल पहले कर्ज उठाया था, जब हमने बेंगलुरु हवाईअड्डे का अधिग्रहण किया था और वह कर्ज बकाया हो रहा था. इसलिए हम निवेशकों से बात कर रहे थे और हमने तीन निवेशकों के साथ करार किया था." यह भी पढ़ें : कुशवाहा ने राजद के साथ नीतीश की ‘डील’ की बात फिर से दोहरायी
रेड्डी ने कहा, "वे एक साथ इस कंपनी में निवेश करने के लिए सहमत हुए, जो हमें कर्ज चुकाने में मदद करेगा. हालांकि, उनके पास किसी भी अंतर्राष्ट्रीय निवेशक की तरह कई शर्ते थीं और फिर हम कोविड की चपेट में आ गए. तीन महीने के लिए हवाईअड्डे का कारोबार बंद था और हमारे पास शून्य राजस्व था. इसने हम पर अधिक वित्तीय दबाव डाला, और इसलिए हम लेन-देन को जल्दी से पूरा करने के लिए उनके साथ काम करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था."
उन्होंने समाचार चैनल को बताया, "तो लगभग उसी समय, गौतम (अडानी) भाई ने मुझसे संपर्क किया और कहा कि उनकी मुंबई हवाईअड्डे में बहुत रुचि है और क्या हम उनके साथ एक ही नियम और शर्तो पर लेनदेन करने को तैयार हैं - केवल अंतर यह है कि उन्होंने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि एक महीने में लेन-देन पूरा हो जाए, जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण था."
उन्होंने कहा, "जहां तक मेरा संबंध है, हमने गौतम अडानी के साथ यह सौदा इस तथ्य के कारण किया था कि यह कंपनी की जरूरत थी. हमें उधारदाताओं को चुकाना था और किसी और का कोई दबाव नहीं था. जहां तक संसद में जो कुछ कहा जा रहा है, उसके अन्य पहलुओं पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि मैं इसकी राजनीति में नहीं पड़ना चाहता."
रेड्डी ने समाचार चैनल को बताया, "देखो, मैं गौतम भाई को कुछ समय से जानता हूं और लेन-देन बहुत आसान था, क्योंकि मुझे उनमें यह चीज मिली कि वह सीधे सौदे करते हैं - वह अपने साथ किसी को नहीं लाते. वह और मैं थे, बस हम दोनों थे. सब कुछ बंद करने में सक्षम होने में हमें लगभग एक सप्ताह का समय लगा. यह बहुत सरल, बहुत सीधा था."
रेड्डी ने समाचार चैनल को बताया, "हमारे पास बहुत सारी शर्ते नहीं थीं, समय सीमा बहुत विशिष्ट थी, ताकि हम इसे जल्दी से पूरा कर सकें और उधारदाताओं का ध्यान रख सकें, जो कि सर्वोच्च प्राथमिकता थी. और उन्होंने यह कहकर उधारदाताओं को आराम भी दिया कि वह करेंगे. उन्होंने यह सब बहुत तेजी से किया, क्योंकि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं थी. इसलिए उनके साथ मेरा व्यवहार उत्कृष्ट रहा है, कोई समस्या नहीं है. जो कुछ भी प्रतिबद्ध था, जो भी समझ थी, हमने इसे बनाए रखा, हमने निष्कर्ष निकाला."
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 08, 2023 08:24 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

