Gorakhpur: मोबाइल पर आपत्तिजनक सामग्री की लत ने बदली मासूम की सोच; चौथी के छात्र ने की अनुचित हरकत, शिक्षिका की बनाई अश्लील तस्वीर
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में ऑनलाइन कक्षाओं के लिए दिए गए स्मार्टफोन के अनियंत्रित उपयोग और अत्यधिक स्क्रीन टाइम का चिंताजनक मामला सामने आया है. सिविल लाइंस क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में कक्षा 4 में पढ़ने वाले छात्र को मोबाइल पर आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री देखने की लत लग गई, जिसके प्रभाव में उसने अपनी सात वर्षीय बहन के साथ अनुचित हरकत की. इसके अलावा छात्र ने विद्यालय की एक महिला शिक्षिका की आपत्तिजनक तस्वीर बनाई और सहपाठियों के साथ अभद्र व्यवहार किया.
गोरखपुर: बच्चों में स्मार्टफोन के अनियंत्रित इस्तेमाल और इंटरनेट पर बिना किसी निगरानी के उपलब्ध आपत्तिजनक सामग्री का दुष्प्रभाव अब प्राथमिक स्तर के स्कूली छात्रों के व्यवहार पर भी दिखने लगा है. गोरखपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित एक प्रतिष्ठित स्कूल के कक्षा 4 के छात्र में मोबाइल की लत के चलते गंभीर मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक बदलाव दर्ज किए गए हैं.
ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर मोबाइल मिलने के बाद छात्र आपत्तिजनक वेबसाइट्स और वीडियो देखने का आदी हो गया. इसके दुष्परिणाम स्वरूप उसने अपनी सात वर्षीय बहन के साथ अनुचित कृत्य किया और स्कूल की शिक्षिका की आपत्तिजनक तस्वीर तैयार कर ली. घटना सामने आने के बाद परिजन उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (मनोवैज्ञानिक) के पास ले गए, जहां उसका नियमित उपचार चल रहा है. यह भी पढ़ें: Gorakhpur Horror: डायल-112 के सिपाही ने 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद की हत्या, अस्पताल में आरोपी की पिटाई; बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू
ऑनलाइन क्लास के नाम पर मिला मोबाइल, बाथरूम तक ले जाने लगा फोन
परिजनों के अनुसार, कोविड और ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान बच्चे को पढ़ाई के उद्देश्य से स्मार्टफोन दिया गया था:
- गेमिंग से एडल्ट कंटेंट तक: शुरुआत में बच्चे ने पढ़ाई के साथ मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे उसकी फोन पर निर्भरता इतनी बढ़ गई कि फोन छीनने पर वह चिड़चिड़ाने और रोने-चीखने लगता था.
- बाथरूम में बिताता था लंबा समय: करीब छह महीने पहले परिजनों ने गौर किया कि बच्चा मोबाइल लेकर बाथरूम में जाने लगा और वहां काफी समय बिताने लगा.
- जब माता-पिता ने फोन की ब्राउजिंग हिस्ट्री जांची, तो उस पर कई एडल्ट और आपत्तिजनक वेबसाइट्स खुली पाई गईं. परिजनों द्वारा समझाने के बावजूद उसके आक्रामक और असामान्य व्यवहार में सुधार नहीं आया.
बहन के साथ की अशोभनीय हरकत, मां ने रंगे हाथ पकड़ा
बच्चे के व्यवहार का सबसे विचलित करने वाला पहलू तब सामने आया जब उसने घर पर अपनी 7 वर्षीय छोटी बहन के कपड़े उतरवा दिए..
- ठीक उसी समय मां अचानक कमरे में पहुंच गईं और स्थिति को देखकर स्तब्ध रह गईं.
- पूछताछ करने पर बच्चे ने स्वीकार किया कि उसने यह सब मोबाइल पर देखे गए वीडियो से प्रेरित होकर किया था.
- इस घटना के बाद परिजनों ने स्थिति की गंभीरता को समझा और उसे तुरंत पेशेवर मनोवैज्ञानिक सहायता दिलाने का निर्णय लिया.
गोरखपुर: चौथी क्लास के छात्र ने पोर्न देखा, बहन के कपड़े उतारे और टीचर की अश्लील तस्वीर बनाई
शिक्षिका की बनाई आपत्तिजनक तस्वीर, स्कूल ने काटा नाम
घर में हुई घटना से पहले स्कूल स्तर पर भी छात्र के व्यवहार को लेकर शिकायतें दर्ज की गई थीं:
- शिक्षिका की तस्वीर से छेड़छाड़: करीब दो महीने पहले स्कूल प्रबंधन ने परिजनों को बुलाकर सूचित किया था कि छात्र ने अपनी एक महिला शिक्षिका की अश्लील व अमर्यादित तस्वीर तैयार की है.
- सहपाठियों से दुर्व्यवहार: कक्षा के अन्य सहपाठियों ने भी उसके अनुचित व्यवहार की शिकायत की थी.
- अनुशासनहीनता और अन्य बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल प्रबंधन ने छात्र का नाम विद्यालय से काट दिया और परिजनों को किसी योग्य मनोचिकित्सक से इलाज कराने की सलाह दी थी.
मनोवैज्ञानिकों की सलाह: बिना निगरानी स्मार्टफोन देना खतरनाक
छात्र का इलाज कर रहे बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, कम उम्र में अनुचित सामग्री के संपर्क में आने से बच्चों के मस्तिष्क में विकृत धारणाएं विकसित होने लगती हैं:
- व्यवहारगत विकार: अत्यधिक स्क्रीन टाइम और अनफिल्टर्ड इंटरनेट बच्चों के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) और सामाजिक व्यवहार को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है.
- अभिभावकों के लिए दिशा-निर्देश: विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को निजी स्मार्टफोन देने से बचें. यदि पढ़ाई के लिए फोन जरूरी हो, तो उसमें पैरेंटल कंट्रोल (Parental Controls) और कंटेंट ब्लॉकर अनिवार्य रूप से सक्रिय रखें और बच्चों के साथ इंटरनेट सुरक्षा पर नियमित संवाद करें.
पहचान संबंधी उलझन को लेकर इंजीनियरिंग छात्र भी ले रहा थेरेपी
इसी तरह के एक अन्य मनोवैज्ञानिक मामले में शहर का एक 21 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र भी काउंसलिंग से गुजर रहा है. परिजनों के अनुसार, वह अक्सर गुमसुम रहता है, अचानक अत्यधिक आक्रामक हो जाता है और अपनी लैंगिक पहचान को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त करता है। छात्र परिजनों पर खुद को लड़की बनाने के लिए दबाव डाल रहा है. मनोचिकित्सकों का कहना है कि विस्तृत क्लीनिकल मूल्यांकन के बाद ही ऐसे मामलों में दीर्घकालिक थेरेपी और समाधान की दिशा तय की जा सकती है.