Fresh Meals on Wheels: लंबी दूरी की ट्रेनों में अब मिलेगा ताजा पका हुआ खाना; पैंट्री कार में 'फ्लेम-लेस' कुकिंग को मिली मंजूरी, जानें क्या है कारण
भारतीय रेलवे ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए लंबी दूरी की ट्रेनों की पैंट्री कार में ताज़ा खाना पकाने की अनुमति दे दी है. वैश्विक स्तर पर एलपीजी आपूर्ति में आ रही दिक्कतों को देखते हुए अब ट्रेनों में इलेक्ट्रिक उपकरणों के जरिए भोजन तैयार किया जाएगा.
मुंबई: लंबी दूरी की ट्रेनों (Long Distance Trains) में सफर करने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है. रेलवे ने सोमवार, 23 मार्च को अपनी कैटरिंग नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए पैंट्री कार (Pantry Car) के भीतर ताजा भोजन तैयार करने की अनुमति दे दी है. अब तक यात्रियों को बेस किचन से पैक किया गया 'प्री-कुक्ड' खाना परोसा जाता था, जिसे केवल गर्म किया जाता था. अधिकारियों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) (LPG) आपूर्ति श्रृंखला में आई भारी बाधाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि 24 घंटे से अधिक की यात्रा करने वाले यात्रियों को भोजन की कमी का सामना न करना पड़े. यह भी पढ़ें: Train Ticket Name Change: ट्रेन टिकट पर नाम बदलवाना है? भारतीय रेलवे के नियमों को समझें; जानें कब और कैसे मिलता है यह मौका
'फ्लेम-लेस' किचन की ओर बढ़ता रेलवे
नई गाइडलाइंस के तहत, आईआरसीटीसी (IRCTC) ने ठेकेदारों को पहले से पैक किए गए खाने के बजाय ट्रेनों में ही ताजा भोजन तैयार करने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए, यह कुकिंग पूरी तरह से 'फ्लेम-लेस' (बिना आग के) होगी.
ट्रेनों की पैंट्री कार को अब इंडक्शन स्टोव, माइक्रोवेव ओवन और इलेक्ट्रिक केटल जैसे बिजली से चलने वाले उपकरणों से लैस किया जा रहा है. इसका उद्देश्य उन बाहरी 'क्लस्टर किचन' पर निर्भरता कम करना है, जो वर्तमान में ईंधन की कमी के कारण सुचारू रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं.
वैश्विक संघर्ष का रेलवे कैटरिंग पर असर
नीति में यह बदलाव अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण एलपीजी आपूर्ति में आई वैश्विक कमी का परिणाम है. यद्यपि भारतीय रेलवे को 'आपातकालीन सेवा' की श्रेणी में रखा गया है और उसे उपलब्ध एलपीजी स्टॉक का 70% हिस्सा प्राथमिकता पर मिलता है, फिर भी आपूर्ति की कमी ने मुंबई जैसे बड़े रेल केंद्रों को प्रभावित किया है. इस किल्लत का असर ई-कैटरिंग सेवाओं पर भी पड़ा है. ट्रेनों में ही उत्पादन शुरू होने से रेलवे को उम्मीद है कि बाहरी सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर किया जा सकेगा और यात्रियों को ताज़ा भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा.
प्रभावित रूट और भविष्य का बुनियादी ढांचा
सूत्रों के मुताबिक, IRCTC ने मुंबई से दिल्ली, हावड़ा, चेन्नई और बेंगलुरु की ओर जाने वाली प्रमुख लंबी दूरी की ट्रेनों में ऑनबोर्ड कुकिंग की अनुमति दे दी है. फिलहाल यह एक अस्थायी उपाय है, लेकिन रेलवे इसे स्थायी बनाने पर विचार कर रहा है. प्रत्येक 'फ्लेम-लेस' पैंट्री कार को अपग्रेड करने की लागत लगभग 60 लाख रुपये अनुमानित है. यह भी पढ़ें: Indian Railways: भारतीय रेलवे और सेना की बड़ी पहल, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को रिटायरमेंट के बाद रेलवे में मिलेंगे करियर के नए अवसर
वंदे भारत सेवाओं में नहीं होगा बदलाव
ताजा खाना पकाने की यह नई अनुमति प्रीमियम वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों पर लागू नहीं होगी. चूंकि ये सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें पूरी पैंट्री कार से लैस नहीं हैं, इसलिए इनमें मौजूदा मॉडल के तहत बेस किचन से लाया गया खाना ही गर्म करके परोसा जाता रहेगा.
रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही खाना पकाने के नियमों में ढील दी गई है, लेकिन सुरक्षा प्राथमिकता बनी रहेगी. कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे शॉर्ट सर्किट के जोखिम से बचने के लिए इलेक्ट्रिकल लोड लिमिट का पूरी तरह पालन करें.