Festival Season Inflation: आगामी त्योहारी सीजन से पहले बिगड़ा रसोई का बजट: चीनी, दाल-चावल, सब्जियां और ड्राई फ्रूट्स हुए महंगे

राशन की दुकानों और खुदरा बाजारों में दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. 5 जुलाई से 21 अगस्त की अवधि के दौरान खाद्य सामग्री के दामों में हुआ बदलाव निम्न प्रकार है:

Festival Season Inflation:  देश में आगामी त्योहारों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई तेजी ने आम आदमी के रसोई के बजट को प्रभावित किया है. चीनी, अरहर दाल, चावल और सरसों तेल के साथ-साथ आलू-प्याज और हरी सब्जियों के खुदरा दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले एक महीने में चीनी के दाम में 20 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है, जबकि खराब मौसम और आपूर्ति में आई रुकावट के कारण प्याज की कीमतें भी लगभग दोगुनी हो चुकी हैं.

चीनी, दाल और सरसों तेल के खुदरा दामों में उछाल

राशन की दुकानों और खुदरा बाजारों में दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. 5 जुलाई से 21 अगस्त की अवधि के दौरान खाद्य सामग्री के दामों में हुआ बदलाव निम्न प्रकार है:

सब्जियों के दामों में बेतहाशा वृद्धि

सब्जी मंडियों में हरी सब्जियों और बुनियादी सब्जियों के दामों में भी तेजी देखी जा रही है. प्याज जहां 30 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है, वहीं आलू 20 रुपये से बढ़कर 25 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. हालांकि, टमाटर की कीमतें 30 रुपये प्रति किलो पर स्थिर बनी हुई हैं.

अन्य सब्जियों में भिंडी 30 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो, फूलगोभी 60 रुपये से 100 रुपये प्रति किलो, लौकी 40 रुपये से 70 रुपये प्रति किलो, करेला 60 रुपये से 80 रुपये प्रति किलो, और खीरा 40 रुपये से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. इसके अलावा, अदरक का भाव 240 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 280 रुपये प्रति किलो हो गया है.

काजू और बादाम भी हुए महंगे

त्योहारों से ठीक पहले मेवों (ड्राई फ्रूट्स) की मांग बढ़ने के साथ इनकी कीमतों में भी भारी इजाफा दर्ज किया गया है. 5 जुलाई को 1,000 रुपये प्रति किलो बिकने वाला काजू 21 अगस्त तक 1,500 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया, जिसमें 500 रुपये प्रति किलो की सीधी बढ़ोतरी हुई है. वहीं, बादाम का भाव 800 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 1,100 रुपये प्रति किलो हो गया है.

कीमतों में उछाल की मुख्य वजह

व्यापारियों और बाजार विश्लेषकों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में हुई भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियों के कारण मंडियों में सब्जियों की आवक और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है. परिवहन में आई रुकावट और त्योहारी मांग में शुरुआती बढ़ोतरी के कारण खुदरा बाजारों में खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, जिससे मध्यम और निम्न-आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है.

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