Fact Check: हरिद्वार में अंडरगार्मेंट्स पहनकर गंगा स्नान करती युवती का वीडियो वायरल; जानें क्या है सच्चाई

सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा था कि एक युवती हरिद्वार में पवित्र गंगा नदी में केवल अंतर्वस्त्रों में स्नान कर धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रही है. इंटरनेट पर इस वीडियो को लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया और धार्मिक स्थलों की गरिमा पर बहस छिड़ गई. हालांकि, स्वतंत्र फैक्ट चेक और जांच में यह दावा पूरी तरह फर्जी साबित हुआ है.

हरिद्वार/नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर धार्मिक स्थलों की मर्यादा और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को लेकर अक्सर वीडियो वायरल होते रहते हैं. हाल ही में एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ, जिसमें दावा किया गया कि उत्तराखंड के हरिद्वार में एक युवती अंतर्वस्त्रों (Bikini/Undergarments) में गंगा स्नान कर रही है.

वीडियो के साथ कई उपयोगकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए इसे तीर्थस्थल की पवित्रता का अपमान करार दिया. हालांकि, LatestLY की फैक्ट चेक रिपोर्ट और पड़ताल में यह दावा पूरी तरह भ्रामक और AI द्वारा हेरफेर (AI Manipulation) किया गया फर्जी वीडियो साबित हुआ है.

सोशल मीडिया पर क्या किया जा रहा था दावा?

विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा साझा की जा रही छोटी वीडियो क्लिप में एक युवती को नदी में डुबकी लगाते दिखाया गया, जिसमें उसके कपड़े आपत्तिजनक रूप से हटाए हुए प्रतीत हो रहे थे.

गंगा में अंडरगारमेंट्स पहनकर नहाती महिला का वायरल वीडियो AI-जनरेटेड है

(Photo Credits: X/@barkhatrehan16)

फैक्ट चेक में क्या सच आया सामने?

NewsX की रिपोर्ट और संपादकीय जांच के दौरान जब वायरल क्लिप के की-फ्रेम्स का रिवर्स इमेज सर्च किया गया, तो इंटरनेट पर इसका मूल वीडियो मिल गया:

ओरिजिनल वीडियो में कंटेंट क्रिएटर सोनम यादव सलवार कमीज में गंगा में नहाती दिख रही हैं

AI और डीपफेक तकनीक से की गई छेड़छाड़

जांच में तकनीकी विश्लेषकों ने पाया कि असामाजिक तत्वों ने व्यूज और सनसनी फैलाने के उद्देश्य से क्रिएटर के मूल वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के जरिए एडिट किया:

अफवाहों से बचने की अपील

जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि हरिद्वार में किसी युवती द्वारा अंतर्वस्त्रों में गंगा स्नान करने का दावा पूरी तरह मनगढ़ंत और असत्य है. सोशल मीडिया पर किसी भी महिला की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के उद्देश्य से एआई का यह दुरुपयोग किया गया था.

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सलाह दी है कि वे बिना पुष्टि किए ऐसे छेड़छाड़ किए गए एआई वीडियो को फॉरवर्ड या शेयर न करें, क्योंकि भ्रामक और अपमानजनक सामग्री साझा करना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है.

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