लखीमपुर खीरी में दहशत का अंत: 2 ग्रामीणों को मार डालने वाला आदमखोर बाघ पिंजरे में कैद, वन विभाग ने दी राहत
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के दक्षिण खीरी वन क्षेत्र में एक सप्ताह से अधिक समय से आतंक का पर्याय बने आदमखोर बाघ को वन विभाग ने सफलतापूर्वक पिंजरे में कैद कर लिया है. इस बाघ पर लगातार दो दिनों में दो ग्रामीणों को मौत के घाट उतारने का संदेह है.
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) जिले के सीमावर्ती गांवों में पिछले एक सप्ताह से जारी दहशत का आखिरकार अंत हो गया है. वन विभाग ने दक्षिण खीरी वन क्षेत्र (South Kheri Forest Area) में एक सघन निगरानी और घेराबंदी अभियान चलाकर उस आदमखोर बाघ को पिंजरे में कैद कर लिया है, जिसने दो ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें मार डाला था. इस बाघ की आवाजाही पर वन विभाग की टीमें लगातार नजर रख रही थीं. बाघ के पकड़े जाने की खबर के बाद रामनगर कलां, खालेपुरवा और आसपास के इलाकों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, जो पिछले कई दिनों से खौफ के साए में जीने को मजबूर थे. यह भी पढ़ें: Fact Check: चंद्रपुर में बाघ के हमले वाला वायरल वीडियो निकला फेक, IFS अधिकारी ने बताया AI से बना
48 घंटे के भीतर दो ग्रामीणों को बनाया था शिकार
वन अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बाघ ने 48 घंटे के भीतर दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों पर जानलेवा हमला किया था। पहला हमला 15 जून को हुआ, जब भीरा थाना क्षेत्र के रामनगर कलां गांव के रहने वाले 60 वर्षीय किसान रामदीन अपने खेतों की तरफ जा रहे थे. रास्ते में घात लगाकर बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
इस घटना के ठीक अगले दिन, यानी 16 जून की शाम करीब 5:30 बजे, संपूर्णानगर रोड पर स्थित खालेपुरवा गांव की रहने वाली 45 वर्षीय कोकिला (पत्नी गेंदन लाल) जब एक खेत में घास काटने गई थीं, तब बाघ ने उन पर हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल अवस्था में परिजन उन्हें पलिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इन दोनों लगातार मौतों के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया था और उन्होंने वन विभाग से तुरंत कार्रवाई की मांग की थी.
ऐसे जाल में फंसा आदमखोर बाघ
लगातार हुए हमलों के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में मुस्तैदी बढ़ा दी थी. बाघ की सटीक लोकेशन और उसकी गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए वन विभाग ने प्रभावित इलाकों में कई जगह कैमरा ट्रैप (Camera Traps) लगाए थे. इसके साथ ही, बाघ के संभावित रास्तों को चिह्नित कर वहां लोहे के मजबूत पिंजरे लगाए गए थे. वन विभाग की विशेष टीमें लगातार सीमावर्ती गांवों में गश्त कर रही थीं.
यह ऑपरेशन उस समय सफल हुआ जब वन विभाग को सूचना मिली कि बाघ उनके द्वारा लगाए गए एक पिंजरे के भीतर दाखिल हो चुका है और जाल में फंस गया है. रेंज अधिकारी अंकित सिंह ने बाघ के पकड़े जाने की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि पकड़े गए बाघ की चिकित्सकीय जांच (Medical Examination) की जाएगी. उन्होंने कहा, "स्वास्थ्य परीक्षण के बाद, उच्च अधिकारियों के निर्देशों और दिशानिर्देशों के अनुसार बाघ को किसी सुरक्षित सुदूर वन क्षेत्र या वन्यजीव अभयारण्य में छोड़ दिया जाएगा."
मानव-वन्यजीव संघर्ष की पुरानी चुनौती
बाघ के पकड़े जाने से भले ही तात्कालिक राहत मिल गई हो, लेकिन ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जंगल से सटे इलाकों में सुरक्षा घेरा और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए.
यह घटना एक बार फिर लखीमपुर खीरी और दुधवा नेशनल पार्क से सटे इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की गंभीर चुनौती को रेखांकित करती है, जहां जंगलों के करीब इंसानी बस्तियां होने के कारण अक्सर जंगली जानवर और इंसानों का आमना-सामना होता है, जो दोनों के लिए ही जानलेवा साबित होता है.