Baghban in UP: 51 साल की शादी के बाद तलाक की दहलीज पर पहुंचा बुजुर्ग दंपति; बुलंदशहर पुलिस की काउंसलिंग के बाद सुलझा विवाद

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में पारिवारिक फिल्म 'बागबान' जैसी वास्तविक दास्तान सामने आई है, जहां पांच दशकों से अधिक (करीब 51 साल) के वैवाहिक जीवन के बाद एक बुजुर्ग दंपति तलाक के मोड़ पर पहुंच गया. चार बेटों द्वारा माता-पिता को आपस में बांट लिए जाने के बाद दोनों के बीच दूरियां और गलतफहमियां बढ़ गई थीं. पुलिस की मध्यस्थता के बाद पति अपनी पत्नी को प्रतिमाह ₹5,000 भरण-पोषण भत्ता देने पर सहमत हुआ और कानूनी अलगाव टल गया.

Couple | Representative Image (Photo Credits: Rawpixel)

बुलंदशहर: उम्र के आखिरी पड़ाव पर जब बुजुर्गों को सबसे ज्यादा अपनों के सहारे की जरूरत होती है, तब औलाद की बेरुखी किस कदर रिश्तों को बिखेर सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में देखने को मिला है. सिकंदराबाद क्षेत्र के रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति का 51 साल पुराना वैवाहिक रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, चार बेटों द्वारा मां-बाप का आपस में 'बंटवारा' कर देने से दोनों अलग-अलग रहने को मजबूर हो गए. दूरियों और संवादहीनता के चलते विवाद इतना गहरा गया कि मामला थाने की चौखट तक पहुंच गया और दोनों ने कानूनी रूप से अलग होने की गुहार लगा दी.  हालांकि, पुलिस की सूझबूझ भरी काउंसलिंग से यह लंबी शादी टूटने से बच गई. यह भी पढ़ें: Kanpur: सड़क पर खुले सीवर गड्ढे में बाइक समेत गिरा डिलीवरी ब्वॉय; सीसीटीवी फुटेज वायरल, स्थानीय लोगों ने बचाई जान

चार बेटों ने किया मां-बाप का बंटवारा: 'बागबान' जैसी बनी स्थिति

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, दंपति के चार बेटे हैं—जिनमें से दो वकालत के पेशे में हैं और दो अपना व्यवसाय चलाते हैं:

बीमारी में दवा के खर्च ने बढ़ाई तल्खी

दोनों के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब हो गई:

महिला परामर्श केंद्र में हुई काउंसलिंग: ₹5,000 मासिक भत्ते पर बनी सहमति

खबरों के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर मामले को पुलिस कार्यालय स्थित महिला परामर्श केंद्र भेजा गया:

कानूनी लड़ाई के मुकाबले कारगर साबित हुआ संवाद

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मामला इस बात का प्रमाण है कि बुढ़ापे में जब पारिवारिक परिस्थितियां बुजुर्गों को भावनात्मक रूप से अलग कर देती हैं, तो अदालत में वर्षों चलने वाली कानूनी लड़ाई के बजाय संवेदनशील बातचीत और व्यावहारिक समाधान ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं.

पुलिस की इस मानवीय पहल की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है, जिसने 51 साल पुराने पवित्र वैवाहिक बंधन को कचहरी और मुकदमों के फेर में उलझने से बचा लिया.

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