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CBSE Three-Language Policy: त्रिभाषा नीति पर सीबीएसई का स्पष्टीकरण, 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का एग्जाम अनिवार्य नहीं; फैसले से छात्रों को बड़ी राहत

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति (Three-Language Policy) को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. बोर्ड के अनुसार, 10वीं की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर देना अनिवार्य नहीं होगा. इस फैसले से छात्रों पर से अकादमिक दबाव कम होने की उम्मीद है.

CBSE Three-Language Policy: त्रिभाषा नीति पर सीबीएसई का स्पष्टीकरण, 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का एग्जाम अनिवार्य नहीं; फैसले से छात्रों को बड़ी राहत
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BSE Three-Language Policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की त्रिभाषा नीति (Three-Language Policy) को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच बने असमंजस पर बोर्ड ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है. सीबीएसई ने साफ किया है कि कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा देना अनिवार्य नहीं होगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भाषा शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ छात्रों पर से अकादमिक बोझ को कम करने की दिशा में इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

नीति को लेकर बना हुआ था असमंजस

भारत की शिक्षा प्रणाली में त्रिभाषा नीति का उद्देश्य छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी और किसी एक आधुनिक भारतीय या विदेशी भाषा में दक्ष बनाना है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में सिफारिश की गई है कि छात्रों को स्कूली स्तर पर तीन भाषाओं का अध्ययन करना चाहिए, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य हैं.  यह भी पढ़े:  CBSE Board Exam 2026: सीबीएसई ने बढ़ाई कक्षा 12वीं के अंकों के वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन की आखिरी तारीख; अब 7 जून तक करें आवेदन

इस सिफारिश के बाद स्कूलों और अभिभावकों के बीच यह भ्रम फैल गया था कि क्या कक्षा 10वीं की मुख्य बोर्ड परीक्षा में भी तीनों भाषाओं का पेपर देना होगा. सीबीएसई के नए स्पष्टीकरण ने अब इस विषय पर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है.

केवल दो भाषाओं की होगी मुख्य बोर्ड परीक्षा

सीबीएसई के वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार, कक्षा 10वीं के छात्रों को मुख्य बोर्ड परीक्षा के लिए केवल दो भाषाओं का चयन करना होता है, जो आमतौर पर हिंदी और अंग्रेजी होती हैं. तीसरी भाषा का अध्ययन केवल आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) या स्कूल-आधारित परीक्षाओं तक ही सीमित रहेगा.

यह विषय मुख्य बोर्ड परीक्षा के अंकों और मूल्यांकन का हिस्सा नहीं बनेगा. इस व्यवस्था से छात्र अनावश्यक मानसिक दबाव के बिना मुख्य विषयों और अपनी पसंद की भाषाओं पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे.

शिक्षाविदों ने किया फैसले का स्वागत

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने सीबीएसई के इस रुख का स्वागत किया है. उनका मानना है कि परीक्षा के दबाव को हटाकर छात्र किसी भी भाषा को अधिक रुचि और व्यावहारिक तरीके से सीख सकते हैं.

यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लचीले और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण के अनुरूप है. इससे यह सुनिश्चित होगा कि भाषाई विविधता और बहुभाषावाद (Multilingualism) को बढ़ावा देने का मूल उद्देश्य भी पूरा हो सके और छात्रों पर पढ़ाई का अनुचित बोझ भी न पड़े.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 29, 2026 04:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).