Maharashtra Doctors Strike Ended: बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र में डॉक्टरों की हड़ताल खत्म; ओपीडी और स्वास्थ्य सेवाएं बहाल
बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी हिदायत और हस्तक्षेप के बाद महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस ले ली है. शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 से मुंबई और महाराष्ट्र के सरकारी व नगर निगम अस्पतालों में ओपीडी और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बहाल हो गई हैं.
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े रुख और हस्ताक्षेप के बाद 'महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स' (Maharashtra Association of Resident Doctors) (MARD) तथा 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' (IMA) ने अपनी राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस ले ली है. हड़ताल खत्म होने से मुंबई के केईएम (KEM), नायर, कूपर और जेजे (JJ) अस्पताल समेत पूरे महाराष्ट्र के सरकारी और बीएमसी अस्पतालों में ओपीडी (OPD), इलेक्टिव सर्जरी, पैथोलॉजी लैब और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं शुक्रवार से सामान्य हो गई हैं.
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि अपनी मांगों के लिए विरोध प्रदर्शन करना कानूनी अधिकार हो सकता है, लेकिन यह मरीजों की जान की कीमत पर नहीं होना चाहिए. यह भी पढ़ें: Maharashtra Resident Doctors Strike: महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, एलोपैथी बनाम होम्योपैथी विवाद में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: "क्या हड़ताल में मरे मरीजों की जान वापस ला सकेंगे?"
प्रभारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ ने डॉक्टरों की हड़ताल का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा:
"हमें पूरे महाराष्ट्र में हजारों मरीजों के स्वास्थ्य की चिंता है. कल आप अपने आंदोलन में सफल हो सकते हैं, लेकिन क्या आप उन मरीजों की जान वापस ला पाएंगे जो हड़ताल के दौरान दम तोड़ देते हैं? कारण चाहे जो भी हो, डॉक्टर हड़ताल पर नहीं जा सकते."
अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि डॉक्टर तुरंत काम पर नहीं लौटते हैं तो उनका वेतन रोका जा सकता है. उच्च न्यायालय के इस रुख के बाद मार्ड और आईएमए के प्रतिनिधियों ने हड़ताल वापस लेने का आश्वासन दिया.
MARD ने होम्योपैथ रजिस्ट्रेशन को लेकर आंदोलन स्थगित किया
ओपीडी और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बहाल
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सेंट्रल मार्ड (Central MARD) और बीएमसी मार्ड (BMC MARD) ने आधिकारिक बयान जारी कर ओपीडी, इलेक्टिव सर्जरी, सेंट्रल लेबोरेटरी और फीवर क्लिनिक की सेवाएं पूर्ण रूप से बहाल करने की घोषणा की.
हड़ताल के दौरान वरिष्ठ डॉक्टरों और इंटर्न्स के भरोसे आपातकालीन (Emergency) और आईसीयू (ICU) वार्ड संचालित हो रहे थे, जो अब पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं.
डॉक्टर क्यों कर रहे थे विरोध? (विवाद का कारण)
रेजिडेंट डॉक्टर और ऑलोपैथिक संगठन (MARD व IMA) राज्य सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसके तहत मॉडर्न फार्माकोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्स (CCMP) करने वाले बीएचएमएस (BHMS - होम्योपैथी) डॉक्टरों को 'महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल' (MMC) में पंजीकृत करने की अनुमति दी गई है.
- एलोपैथिक डॉक्टरों का तर्क: मार्ड और आईएमए का कहना है कि महज 6 महीने का कोर्स करके होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति देना मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा है और यह चिकित्सा पेशे की सीमाओं को धुंधला करता है.
- होम्योपैथिक संघों का रुख: वहीं, होम्योपैथिक संगठनों का कहना है कि ब्रिज कोर्स के माध्यम से डॉक्टरों को आवश्यक प्रशिक्षण मिलता है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलती है.
आगे का रास्ता और समिति का गठन
मार्ड ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल हाईकोर्ट के आदेश के सम्मान में हड़ताल स्थगित की है, जबकि नीतिगत फैसले के खिलाफ उनका विरोध लोकतांत्रिक और कानूनी माध्यमों से जारी रहेगा.
अदालत ने मामले को सुलझाने के लिए राज्य सरकार के 3 अगस्त के शासनादेश (GR) के तहत एक विशेष समिति गठित करने का निर्देश दिया है. यह समिति (जिसमें IMA, रेजिडेंट डॉक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी शामिल होंगे) पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करेगी। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को तय की गई है.