Divya Mittal Enters Politics: पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, स्वतंत्र जन मंच बनाने का किया ऐलान; VIDEO
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफे के एक महीने बाद राजनीति में कदम रखने का ऐलान किया है. उन्होंने बिना किसी राजनीतिक दल में शामिल हुए नागरिकों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र जन मंच बनाने की घोषणा की है.
Divya Mittal Enters Politics: पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में कदम रखने का ऐलान किया है. प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के करीब एक महीने बाद, मंगलवार 29 सितंबर को उन्होंने घोषणा की कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी. इसके बजाय, वह आम नागरिकों के साथ सीधे जुड़कर एक स्वतंत्र जन मंच का निर्माण करेंगी.
वर्ष 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को 13 साल के प्रशासनिक करियर से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली थी. उनका कहना है कि राजनीति में आने का मुख्य उद्देश्य उन वंचित नागरिकों की आवाज बनना है, जिनकी समस्याएं सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पातीं या पहुंचने के बाद भी अनसुनी रह जाती हैं. यह भी पढ़े: UP Rajya Sabha Election 2026: यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए नामांकन आज से शुरू, BJP और सपा में प्रत्याशियों को लेकर मंथन तेज
दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री
नौकरशाही की सीमाओं से आगे
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में पूर्व अधिकारी ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया. उन्होंने कहा कि जन सेवाओं में देरी और संस्थागत बाधाओं की मूल वजह संसाधनों या नियमों की कमी नहीं, बल्कि "इच्छाशक्ति का अभाव" (lack of intent) है.
जिलाधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के उदाहरण देते हुए उन्होंने लहुड़ियादह गांव में स्कूल भवन निर्माण में देरी और राजस्व विभाग में भूमि आवंटन से जुड़ी फाइलों के अटकने का जिक्र किया. मित्तल के अनुसार, इन प्रशासनिक समस्याओं का समाधान केवल प्रशासनिक सुधारों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यापक ढांचागत बदलाव और सार्वजनिक जवाबदेही की आवश्यकता है.
नागरिक-केंद्रित मंच का निर्माण
दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि वह पारंपरिक वोट-बैंक, जातिगत समीकरण या बाहुबल के आधार पर राजनीति नहीं करेंगी. उनका ध्यान दीर्घकालिक सुशासन, युवाओं के रोजगार और प्रशासनिक पारदर्शिता पर केंद्रित रहेगा.
उत्तर प्रदेश को अपनी मुख्य "कर्मभूमि" बताते हुए उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों से इस स्वतंत्र पहल से जुड़ने की अपील की है. अपने राजनीतिक प्रयास से लोगों को जोड़ने के लिए उन्होंने एक व्हाट्सऐप नंबर (9198956957) भी जारी किया है.