कांग्रेस ने ज्ञानवापी से किनारा किया, कहा: यह पाटने वाली रणनीति है
वाराणसी की अदालत द्वारा पांच हिंदू महिलाओं द्वारा दायर याचिका की सुनवाई को स्वीकार करने के बाद कांग्रेस ने पूरे विवाद से दूरी बनाए रखी है और अदालत के आदेश आने के बाद से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
नई दिल्ली, 17 सितंबर : वाराणसी की अदालत द्वारा पांच हिंदू महिलाओं द्वारा दायर याचिका की सुनवाई को स्वीकार करने के बाद कांग्रेस ने पूरे विवाद से दूरी बनाए रखी है और अदालत के आदेश आने के बाद से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. कांग्रेस की रणनीति उस विवाद में फंसने की नहीं है जो पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि वास्तविक आर्थिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा. संपर्क करने पर कांग्रेस नेताओं ने बोलने से इनकार कर दिया और कहा कि हमारी प्राथमिकताएं भाजपा से अलग हैं. लोग महंगाई और बेरोजगारी से कराह रहे हैं जो असली मुद्दे हैं. उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा विभिन्न धर्मो के बीच की खाई को पाटने और भाजपा-आरएसएस द्वारा प्रचारित नफरत को दूर करने के लिए है.
राजनीतिक विश्लेषक शकील अख्तर ने कहा, "पूरा मामला घड़े को उबालने का है. कांग्रेस ने बिलकिस बानो के मुद्दे पर बात की है और अदालत की सुनवाई पर टिप्पणी नहीं करना अच्छी बात है. हालांकि, मीडिया को हिंदू-मुसलमान का जिक्र करना बंद कर देना चाहिए." यात्रा के माध्यम से कांग्रेस सांप्रदायिक मुद्दे का मुकाबला करने की उम्मीद करती है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है, "यात्रा के जरिए कांग्रेस पार्टी पिछले आठ साल में भाजपा को हुए नुकसान की भरपाई करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने देश को बांट दिया है." यह भी पढ़ें : राष्ट्रीय मुद्दों को दबाने के लिए प्रधामंत्री ने चीते छोड़ने का तमाशा खड़ा किया: कांग्रेस
पार्टी के नेता इसे सत्तारूढ़ भाजपा की 'दिखावटी रणनीति' बता रहे हैं. कांग्रेस 1991 के अधिनियम के प्रावधानों का अक्षरश: पालन करना चाहती है, यह कहते हुए कि पूजा स्थलों की स्थिति में किसी भी तरह के बदलाव से बड़े पैमाने पर संघर्ष होगा. पूजा स्थलों पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग करते हुए कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने मई में कहा था, "मामला सुप्रीम कोर्ट के अधीन है और हमें उम्मीद है कि न्याय मिलेगा, क्योंकि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद का मामला पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के आधार पर तय किया गया था, जो कहता है कि धार्मिक चरित्र पूजा स्थल वही रहेगा जो 15 अगस्त 1947 को अस्तित्व में था."
कांग्रेस ने इसे एक 'राजनीतिक' कदम करार देते हुए कहा कि यह महंगाई, बेरोजगारी और गिरते रुपये के मुद्दों को ठंडे बस्ते में डालने के लिए भाजपा की 'विचलनकारी' रणनीति है. पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा था कि सभी पूजा स्थलों पर यथास्थिति बनाए रखी जानी चाहिए अन्यथा इससे संघर्ष होगा. उन्होंने कहा, "राम जन्मभूमि को छोड़कर नरसिम्हा राव सरकार द्वारा पूजा स्थल अधिनियम पारित किया गया था. अन्य सभी स्थानों पर यथास्थिति होनी चाहिए, क्योंकि किसी भी तरह के बदलाव से बड़ा संघर्ष हो सकता है."
कांग्रेस इस बात पर जोर देती है कि भाजपा के साथ वैचारिक मतभेद कांग्रेस की राजनीति के मूल में हैं और लोगों के हितों के लिए लड़ना मंथन सत्र से महत्वपूर्ण सबक है. लेकिन पार्टी को अब ज्ञानवापी विवाद में परखा गया है जो राजनीतिक विमर्श में एक नया विवाद हो सकता है. उसे अब इस मुद्दे पर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा. राजस्थान के कांग्रेस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था, "भाजपा की नीतियां देश को बांट रही हैं और यह खतरनाक है जो देश को गृहयुद्ध के कगार पर ला सकती हैं. कांग्रेस इसकी अनुमति नहीं देगी और इस यात्रा का फोकस ध्रुवीकरण का मुकाबला करना है." कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था कि यह यात्रा भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ होगी और एक नई शुरुआत होगी.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 17, 2022 02:23 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

