Coal Scam Case: सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की, दिवंगत पूर्व PM मनमोहन सिंह के खिलाफ केस बंद
सुप्रीम कोर्ट ने ओड़िशा के तालाबिला-द्वितीय (Talabira-II) कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के 2015 के उस आदेश को रद्द कर दिया
Coal Scam Case: सुप्रीम कोर्ट ने ओड़िशा के तालाबिला-द्वितीय (Talabira-II) कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के 2015 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह को आरोपी के रूप में समन जारी किया गया था. शीर्ष अदालत के इस फैसले के साथ ही इस मामले में चल रही सभी आपराधिक कार्रवाइयां औपचारिक रूप से समाप्त हो गई हैं.
CBI की क्लोजर रिपोर्ट को दी मंजूरी
ट्रायल कोर्ट ने 2015 में सीबीआई द्वारा दी गई क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व कोयला सचिव पी. सी. पारख और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला समेत अन्य लोगों को समन जारी किया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि जांच एजेंसी द्वारा पर्याप्त सबूत न मिलने के आधार पर दायर की गई रिपोर्ट को अस्वीकार करने का विशेष न्यायाधीश के पास कोई ठोस कारण नहीं था.
मरणोपरांत मिला न्याय
दिसंबर 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हो गया था. यद्यपि उनके निधन के बाद याचिका सैद्धांतिक रूप से निष्प्रभावी (Infructuous) हो सकती थी, लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड पर दर्ज प्रतिकूल टिप्पणियों की समीक्षा करना आवश्यक समझा. पीठ ने कहा कि सीबीआई की दो क्लोजर रिपोर्टों का गहन अध्ययन करने के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि मामले को गुण-दोष (Merits) के आधार पर बंद किया जाना ही न्यायसंगत है.
क्या था तालाबिला-द्वितीय कोयला ब्लॉक मामला?
यह मामला वर्ष 2005 में यूपीए सरकार के शासनकाल के दौरान ओड़िशा के तालाबिला-द्वितीय कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था. उस समय कोयला मंत्रालय का प्रभार भी तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास ही था. सीएजी (CAG) की रिपोर्ट में आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज किया था. हालांकि, अपनी जांच के अंत में सीबीआई ने पाया था कि डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ किसी भी आपराधिक मंशा या साजिश के सबूत नहीं मिले हैं.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर लगे आपराधिक आरोपों का अध्याय पूरी तरह समाप्त हो गया है. उनके वकीलों वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा था कि विशेष अदालत द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण था. सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम निर्णय से दिवंगत नेता को मरणोपरांत पूर्ण क्लीन चिट मिल गई है.