CJP Protest: FIR जांच जारी रखने के SC के अंतरिम आदेश पर भड़की सीजेपी, सरकार ने केस वापस नहीं लिए तो फिर शुरू होगा देशव्यापी आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 2026 NEET पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशव्यापी छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था. 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थीं.

CJP Protest News: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सुप्रीम कोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें हालिया छात्र आंदोलनों से जुड़े FIR मामलों की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है. CJP ने आरोप लगाया कि यह आदेश 25 जुलाई को केंद्र सरकार द्वारा दिए गए उस आश्वासन के विपरीत है, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लेने का वादा किया गया था. पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपना वादा पूरा नहीं करती है, तो देशभर में फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा.

FIR जांच जारी रखने के आदेश पर CJP की आपत्ति

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बयान जारी कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम व्यवस्था के निर्देश संख्या-4 के तहत राज्य सरकारों और पुलिस को पहले से दर्ज FIR की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है.

उनका कहना है कि यह फैसला केंद्र सरकार और छात्र नेताओं के बीच 25 जुलाई को हुए समझौते की भावना के खिलाफ है. CJP ने दावा किया कि इसी आश्वासन के बाद एक महीने से चल रहा आंदोलन वापस लिया गया था.

सरकार पर वादा तोड़ने का आरोप

सौरव दास ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को यह नहीं बताया कि सरकार पहले ही शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन दे चुकी है.

उन्होंने कहा कि यदि अदालत के सामने समझौते की पूरी जानकारी रखी जाती, तो अंतरिम आदेश अलग हो सकता था.

छात्रों के उत्पीड़न की जताई आशंका

CJP ने आशंका जताई कि इस आदेश का इस्तेमाल कुछ राज्य सरकारें और जांच एजेंसियां शांतिपूर्ण छात्र कार्यकर्ताओं को परेशान करने के लिए कर सकती हैं.

हालांकि, संगठन ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी सरकार को FIR वापस लेने से नहीं रोका गया है. आपराधिक प्रक्रिया के तहत सरकार चाहे तो मामलों को वापस लेने या अभियोजन नहीं चलाने का फैसला कर सकती है.

बिहार और असम का दिया उदाहरण

CJP ने कहा कि बिहार और असम की सरकारें पहले ही गैर-हिंसक छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी हैं. संगठन ने केंद्र सरकार से भी इसी तरह का कदम उठाने की मांग की.

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सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

CJP ने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकारें 25 जुलाई के समझौते की शर्तें सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आधिकारिक रूप से पेश करें, ताकि अदालत अगली सुनवाई में पूरी जानकारी के आधार पर फैसला ले सके.

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि 28 जुलाई तक सरकार ने FIR वापस लेने के अपने वादे को पूरा नहीं किया, तो CJP एक बार फिर देशभर में अपने समर्थकों के साथ आंदोलन शुरू करेगा.

क्या है पूरा मामला?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 2026 NEET पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशव्यापी छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था. 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थीं.

बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने अंतरिम आदेश में नाबालिगों और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर रोक लगाते हुए पुलिस कार्रवाई और हिंसा के आरोपों की जांच के निर्देश दिए.

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