पिंजरे से सीबीआई रूपी तोते को आजाद करे केंद्र : मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को पिंजरे में बंद तोते को रिहा करने या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं. तमिलनाडु पुलिस द्वारा की जा रही जांच पर एक वित्त कंपनी द्वारा धोखाधड़ी के मामले को केंद्रीय एजेंसी को स्थानांतरित करने के मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, अदालत की मदुरै पीठ ने मंगलवार को यह टिप्पणी की.
चेन्नई, 19 अगस्त : मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार (Central Government) को पिंजरे में बंद तोते को रिहा करने या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं. तमिलनाडु पुलिस (Tamil Nadu Police) द्वारा की जा रही जांच पर एक वित्त कंपनी द्वारा धोखाधड़ी के मामले को केंद्रीय एजेंसी को स्थानांतरित करने के मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, अदालत की मदुरै पीठ ने मंगलवार को यह टिप्पणी की. मदुरै पीठ ने कहा, एजेंसी की स्वायत्तता तभी सुनिश्चित होगी, जब उसे वैधानिक दर्जा दिया जाएगा. दूसरी बात यह है कि अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर प्राप्त किए बिना अपने दम पर अधिकारियों का एक समर्पित संवर्ग होना चाहिए. अदालत ने कहा, सीबीआई की भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की तरह ही स्वायत्तता होनी चाहिए, जो केवल संसद के प्रति जवाबदेह है.
अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई निदेशक को भारत सरकार के सचिव की पदेन शक्तियों के साथ निहित किया जाना चाहिए, जिसमें कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के माध्यम से जाए बिना सीधे मंत्रालय को रिपोर्ट करना शामिल है. कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार को सीबीआई को अधिक अधिकार और शक्तियां देने के लिए एक अलग अधिनियम बनाने के लिए विचार करना चाहिए. अदालत ने इस संबंध में एक निर्णय लेने के आदेश भी दिए, ताकि सीबीआई केंद्र के प्रशासनिक नियंत्रण के बिना कार्यात्मक स्वायत्तता के साथ अपना काम कर सके. हाईकोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि सीबीआई को चुनाव आयोग और भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की तरह और अधिक स्वतंत्र बनाया जाए और एजेंसी के लिए एक अलग बजटीय आवंटन किया जाए. यह भी पढ़ें : Bihar: जाति के आधार पर जनगणना की मांग को लेकर नीतीश कुमार 23 अगस्त को करेंगे प्रधानमंत्री से मुलाकात
अदालत ने कहा कि सीबीआई निदेशक को सरकार के सचिव के रूप में शक्तियां दी जानी चाहिए और उसे डीओपीटी से गुजरे बिना सीधे मंत्री/प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करनी चाहिए. अदालत ने डीओपीटी को इस आदेश की एक प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह सप्ताह की अवधि के भीतर, यदि आवश्यक हो, तो अन्य विभागों के साथ परामर्श करने के बाद 9 सितंबर, 2020 के सीबीआई पुनर्गठन पत्र पर आदेश पारित करने के लिए कहा. इसने कहा कि सीबीआई को (1) साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञों (2) और वित्तीय ऑडिट विशेषज्ञों की स्थायी भर्ती के लिए, इस आदेश की एक प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह सप्ताह की अवधि के भीतर एक सुविचारित नीति दाखिल करनी चाहिए, ताकि सभी सीबीआई की शाखाओं/विंगों के पास ये विशेषज्ञ उपलब्ध होने चाहिए न कि मामले के आधार पर.
डीओपीटी को सीबीआई के बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित सभी लंबित प्रस्तावों को मंजूरी देनी चाहिए. अदालत ने कहा कि छह सप्ताह की अवधि के भीतर भूमि निर्माण, आवासीय आवास, उपलब्ध तकनीकी उपकरणों का उन्नयन आदि पर काम होना चाहिए. इसके अलावा सीबीआई से जुड़े सीएफएसएल को 31 दिसंबर, 2020 तक के सभी लंबित मामलों को निपटाने की बात कही गई है. इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई द्वारा एक वर्ष से अधिक समय से आरोप पत्र दायर किए जाने के बावजूद जिन मामलों में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय नहीं किए गए हैं, उनका विवरण सीबीआई निदेशक द्वारा उच्च न्यायालयों के संबंधित रजिस्ट्रार जनरल के साथ साझा किया जाना चाहिए. यह भी पढ़ें : Bihar: जाति के आधार पर जनगणना की मांग को लेकर नीतीश कुमार 23 अगस्त को करेंगे प्रधानमंत्री से मुलाकात
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई ने खुद कहा है कि उसे जनशक्ति की कमी की बाधाओं के भीतर ही काम करना पड़ता है, इसलिए सीबीआई निदेशक को एक और विस्तृत प्रस्ताव भेजना चाहिए, जिसमें डिवीजनों/विंगों में और साथ ही सीबीआई अधिकारियों की ताकत केंद्र को बढ़ाने की मांग की जाए. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की एक प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह सप्ताह की अवधि के भीतर और केंद्र को इसकी प्राप्ति के तीन महीने की अवधि के भीतर इस पर आदेश पारित करना चाहिए. बता दें कि वर्ष 2013 में कोलफील्ड आवंटन मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई पर टिप्पणी की थी और उसे पिंजरे में बंद तोते के रूप में वर्णित किया था. उस समय विपक्षी पार्टी भाजपा ने एजेंसी पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा नियंत्रित होने का आरोप लगाया था.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 19, 2021 12:41 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

