मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में ट्रैफिक कम करने के लिए MMRDA की नई पहल शुरू, 2 लाख कर्मचारियों को मिलेगा फायदा; जानें कैसे
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को कम करने के लिए 'कार-फ्री फ्राइडे' पहल की शुरुआत की है. इसके तहत हर शुक्रवार को करीब 2 लाख कॉर्पोरेट कर्मचारियों को निजी कारों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
BKC Car-Free Fridays: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के सबसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्र बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में ट्रैफिक की गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक अनोखा प्रयोग शुरू किया गया है. मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने इस कमर्शियल हब में 'कार-फ्री फ्राइडे' (Car-Free Fridays) अभियान की शुरुआत की है. इस पहल के तहत बीकेसी में काम करने वाले करीब 2,00,000 पेशेवरों से अपील की जा रही है कि वे हर शुक्रवार को अपनी निजी कारों या ऐप-आधारित टैक्सियों को घर पर ही छोड़ें और ट्रेनों, मेट्रो व बसों जैसे सार्वजनिक परिवहन का विकल्प चुनें. अधिकारियों के मुताबिक, भारत के किसी भी बड़े कॉर्पोरेट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में इस तरह का यह पहला बड़े पैमाने का प्रयास है.
कई सरकारी विभागों और कंपनियों का मिला साथ
इस अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए एमएमआरडीए ने बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST), मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL), ट्रैफिक पुलिस, ऑटो-रिक्शा यूनियनों और डब्लूआरआई (WRI) इंडिया के साथ हाथ मिलाया है.
राहत की बात यह है कि बीकेसी में काम करने वाली करीब 90 बड़ी कंपनियों और संगठनों ने इस मुहिम को अपना सैद्धांतिक समर्थन दे दिया है. इसके अलावा, एमएमआरडीए ने अपने स्वयं के लगभग 2,000 स्थायी और संविदात्मक कर्मचारियों को भी अनिवार्य रूप से इस अभियान में शामिल होने के निर्देश दिए हैं. यह कार्यक्रम शुरुआत में तीन से चार महीनों के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जाएगा, जिसके बाद इसके परिणामों की समीक्षा की जाएगी.
शुक्रवार का दिन ही क्यों चुना गया?
एमएमआरडीए के अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के लिए शुक्रवार का चयन बेहद सोच-समझकर किया गया है. अधिकारियों का मानना है कि सप्ताह के अंतिम कार्यदिवस (Workweek) पर कर्मचारियों के पास काम को लेकर थोड़ी लचीली स्थिति होती है. इस दिन सोमवार की तुलना में कम बैठकें होती हैं और समय पर दफ्तर पहुंचने का तनाव भी थोड़ा कम रहता है.
इसके विपरीत, सोमवार को नए सप्ताह की शुरुआत, सख्त डेडलाइन और भारी काम के दबाव के कारण ऐसे किसी प्रयोग के लिए उपयुक्त नहीं माना गया.
पब्लिक ट्रांसपोर्ट के क्या हैं विकल्प?
बीकेसी वर्तमान में कई सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जुड़ा हुआ है. हाल ही में शुरू हुई एक्वा लाइन (मेट्रो लाइन 3) इस व्यावसायिक क्षेत्र को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करती है. इसके अलावा, पास के बांद्रा और कुर्ला उपनगरीय रेलवे स्टेशनों से बीकेसी के लिए फीडर बस सेवाएं उपलब्ध हैं.
बेस्ट (BEST) इस क्षेत्र में रोजाना 100 से अधिक बस सेवाओं का संचालन करता है, जिसका लाभ पहले से ही 25,000 से 30,000 यात्री उठा रहे हैं. बांद्रा और कुर्ला स्टेशनों को सीधे बीकेसी के प्रमुख स्थानों से जोड़ने के लिए पांच से छह फीडर रूट सक्रिय हैं. साथ ही अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (Last-Mile Connectivity) को मजबूत करने के लिए ऑटो-रिक्शा यूनियनों के साथ भी समन्वय बिठाया जा रहा है.
'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' अब भी बड़ी चुनौती
मेट्रो और बस सुविधाओं के विस्तार के बावजूद, अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि मेट्रो या रेलवे स्टेशन से ऑफिस बिल्डिंग तक पहुंचने की दूरी (Last-Mile Connectivity) अभी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है.
एक वित्तीय सेवा फर्म के कार्यकारी के अनुसार, मेट्रो के जरिए बीकेसी पहुंचना तो आसान है, लेकिन स्टेशन से बाहर निकलकर ऑफिस तक के आखिरी सफर के लिए शेयरिंग ऑटो-रिक्शा या फीडर बस मिलना काफी चुनौतीपूर्ण होता है. हालिया गतिशीलता (Mobility) अध्ययनों से पता चलता है कि एक्वा लाइन मेट्रो होने के बावजूद बीकेसी के 52 प्रतिशत कर्मचारी अब भी निजी वाहनों और टैक्सियों पर निर्भर हैं. केवल 25 प्रतिशत कर्मचारी ही सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं, जबकि आधे से अधिक वर्कफोर्स यात्रा में हर दिन दो घंटे से अधिक का समय बिताती है.
समस्याओं को दूर करने के लिए भविष्य की योजनाएं
इस बुनियादी समस्या को हल करने के लिए प्रशासन ने कई तरह के हस्तक्षेपों की रूपरेखा तैयार की है. मुख्य चौराहों पर समर्पित यू-टर्न और टर्निंग लेन बनाई जा रही हैं ताकि बेस्ट बसों का चक्कर लगाने का समय कम हो और उनकी फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जा सके. इसके साथ ही, कॉर्पोरेट परिसरों से अपनी आंतरिक सड़कों को पैदल चलने वालों के लिए खोलने का आग्रह किया गया है.
दीर्घकालिक योजनाओं में पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए छायादार रास्ते, ग्रीन कैनोपी, मिस्ट ब्लोअर और हर मौसम के अनुकूल पेडेस्ट्रियन कॉरिडोर बनाना शामिल है, ताकि लोग पैदल चलने के प्रति आकर्षित हों.
कर्मचारियों को दिए जाएंगे विशेष इंसेंटिव
सर्वेक्षणों से पता चला है कि यदि सार्वजनिक परिवहन सेवाएं अधिक विश्वसनीय और सुगम हो जाएं, तो 82 प्रतिशत लोग निजी वाहन छोड़ने को तैयार हैं.
इस बदलाव को बढ़ावा देने के लिए अभियान में शामिल कंपनियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे अपने कर्मचारियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट रीइंबर्समेंट (किराया वापसी), रीवार्ड प्रोग्राम और आंतरिक पहचान पत्र जैसे इंसेंटिव (प्रोत्साहन) प्रदान करें. यह प्रयोग तय करेगा कि क्या बीकेसी आने वाले दिनों में देश के अन्य कमर्शियल हब के लिए एक आदर्श ट्रांसपोर्ट मॉडल बन पाएगा या नहीं.