Bihar: लालू यादव की मुश्किलें बढ़ी, नौकरी के बदले जमीन मामले में सीबीआई को मिली RJD प्रमुख के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी
पटना के रहने वाले कई लोगों ने खुद या अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से प्रसाद के परिवार के सदस्यों और उनके परिवार द्वारा नियंत्रित एक निजी कंपनी के पक्ष में पटना स्थित अपनी जमीन बेची थी, वे ऐसी अचल संपत्तियों के हस्तांतरण में भी शामिल थे. रेलवे में भर्ती के लिए विज्ञापन या कोई सार्वजनिक नोटिस जारी नहीं किया गया था.
नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार (Bihar) के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad yadav) की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. जमीन के बदले नौकरी से जुड़े मामले में लालू के खिलाफ सीबीआई (CBI) को गृह मंत्रालय (Home Ministry) से मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई है. सीबीआई ने पिछले साल अक्टूबर में अपने आरोप पत्र में लालू प्रसाद, उनकी पत्नी, बेटी, मध्य रेलवे के तत्कालीन जीएम, तत्कालीन मुख्य कार्मिक अधिकारी (CPO), निजी व्यक्तियों और मामले में कुछ उम्मीदवारों सहित 16 आरोपियों को नामजद किया था. सीबीआई ने कहा था कि जांच के दौरान यह पाया गया है कि आरोपियों ने मध्य रेलवे के तत्कालीन महाप्रबंधक और केंद्रीय रेलवे के सीपीओ के साथ साजिश रचकर जमीन के बदले में अपने या अपने करीबी रिश्तेदारों के नाम पर लोगों को नियुक्त किया था.
सीबीआई ने चार्जशीट में आरोप लगाया है, उम्मीदवारों ने गलत टीसी का इस्तेमाल किया है और रेल मंत्रालय को झूठे प्रमाणित दस्तावेज जमा किए हैं. सीबीआई को जांच के दौरान पता चला है कि लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी और बेटी हेमा यादव को नौकरी चाहने वालों द्वारा नौकरी घोटाले के लिए भूमि के संबंध में जमीन उपहार में दी गई थी, जिन्हें बाद में रेलवे में भर्ती की गई थी. Budget 2023: 1 फरवरी को पेश होगा आम बजट, जानें बजट सत्र से जुड़े रोचक तथ्य और इतिहास
रेलवे कर्मचारी हरिदयानंद चौधरी और लालू प्रसाद के तत्कालीन ओएसडी भोला यादव को पहले सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. भोला 2004 से 2009 के बीच लालू के ओएसडी थे. अधिकारी ने कहा कि 2004 से 2009 की अवधि के दौरान, लालू प्रसाद ने उम्मीदवारों से रेलवे के विभिन्न जोन में ग्रुप डी के पदों पर नौकरी के बदले अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन ली थी और आर्थिक लाभ प्राप्त किया था.
पटना के रहने वाले कई लोगों ने खुद या अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से प्रसाद के परिवार के सदस्यों और उनके परिवार द्वारा नियंत्रित एक निजी कंपनी के पक्ष में पटना स्थित अपनी जमीन बेची थी, वे ऐसी अचल संपत्तियों के हस्तांतरण में भी शामिल थे. रेलवे में भर्ती के लिए विज्ञापन या कोई सार्वजनिक नोटिस जारी नहीं किया गया था. फिर भी जो पटना के निवासी थे, उन्हें मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में स्थित विभिन्न जोनल रेलवे में सब्स्टिटूट के रूप में नियुक्त किया गया था.
सीबीआई का कहना है कि इस मामले में पटना में 1,05,292 फुट जमीन लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों ने विक्रेताओं को नकद भुगतान कर अधिग्रहित की थी.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 13, 2023 09:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

